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नक्सलियों की ‘शांति वार्ता’ अपील पर सरकार बिना शर्त बातचीत को राजी

जगदलपुर 02 अप्रैल (वार्ता) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर आने के ठीक पहले माओवादियों ने संघर्ष विराम और शांति वार्ता का आह्वान किया है जबकि सरकार ने भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार की सार्थक वार्ता के लिए तैयार है, बशर्ते कि इसके लिए कोई शर्त न हो।
सुरक्षा बलों के जवानों को भारी पड़ता देख नक्सलियों के संगठन भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति ने केंद्र सरकार से ‘ऑपरेशन कगार’ को रोकने का आग्रह किया है। नक्सलियों द्वारा यह पत्र तेलगु भाषा में जारी किया गया है।
वहीं श्री अमित शाह चार और पांच अप्रैल को दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ में रहेंगे। उससे ठीक पहले माओवादियों ने संघर्ष और शांतिवार्ता के लिए यह पत्र लिखा है। यह पत्र भाकपा केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने जारी किया है।
नक्सलियों के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह विभाग का भी प्रभार है, ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार की सार्थक वार्ता के लिए तैयार है, बशर्ते कि इसके लिए कोई शर्त न हो। उन्होंने कहा कि यदि नक्सली वास्तव में मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं और बातचीत के लिए इच्छुक हैं तो उन्हें अपने प्रतिनिधि तथा वार्ता की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा।
श्री शर्मा ने कहा कि वार्ता का स्वरूप आईएसआईएस जैसी किसी कट्टरपंथी विचारधारा की तर्ज पर नहीं हो सकता. यदि कोई चर्चा करना चाहता है तो उसे भारतीय संविधान की मान्यता स्वीकार करनी होगी। अगर संविधान को नकारते हैं और समानांतर व्यवस्था थोपने की कोशिश करते हैं तो वार्ता का कोई औचित्य नहीं रहता।
वहीं नक्सलियों के शांति वार्ता के पत्र पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार को विचार करने की बात कही है। उन्होंने कहा,“शांति वार्ता के लिए नक्सलियों की ओर से ठोस निर्णय आया है तो इस पर विचार करनी चाहिए। किस स्थिति पर शांति वार्ता करना चाहते हैं, शांति वार्ता का मकसद क्या है, बस्तर की शांति के लिए क्या बेहतर हो सकता है, इस पर सरकार क्या सोचती है, यह निर्णय सरकार को करनी चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार अपनी वाहवाही लूटने के लिए प्रोपेगेंडा कर रही है।”
सं.संजय
वार्ता