नैनीताल, 06 नवम्बर (वार्ता) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा की जमीन पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मामले में जिलाधिकारी अल्मोड़ा को जांच के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने कहा है कि संस्थान की ओर से अतिक्रमण के संबंध में विस्तृत प्रत्यावेदन दिए जाने के बाद जिलाधिकारी राजस्व अधिकारियों की एक समिति गठित कर आरोपों की जांच कराएं। समिति की अध्यक्षता तहसीलदार से कम रैंक का अधिकारी नहीं करेगा। अदालत ने इस मामले में विगत शनिवार को सुनवाई की लेकिन आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हुई।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान की ओर से दायर याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया है।
याचिका में संस्थान की ओर से आरोप लगाया गया कि अल्मोड़ा स्थित उसकी भूमि पर कुछ लोगों ने अनधिकृत कब्जा कर निर्माण कर लिया है। संस्थान का यह भी कहना था कि इस संबंध में जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को कई बार शिकायत एवं प्रत्यावेदन दिए गए लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
संस्थान ने उच्च न्यायालय से मांग की कि उसकी भूमि से अतिक्रमण हटाने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को पूर्व में दिए गए पत्रों पर कार्रवाई करने और जमीन पर आगे किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण व अतिक्रमण को रोकने के निर्देश दिए जाएं।
रवीन्द्र.अभय
वार्ता