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वैश्विक उर्वरक संकट के बीच आईसीएआर-सीआईबीए का मछली के कचरे से बना जैव-उर्वरक दे रहा है टिकाऊ विकल्प

चेन्नई, 06 जून (वार्ता) तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित केंद्रीय खारा जलजीव पालन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीआईबीए) ने मछली के कचरे से जैव-उर्वरक बनाने की नयी तकनीक विकसित की है। वैश्विक उर्वरक संकट के बीच यह तकनीक पारंपरिक खादों का एक टिकाऊ और फायदेमंद विकल्प पेश करती है। संस्थान ने पूरी तरह से मछली बाजार के कचरे से दो नये उत्पाद 'सीआईबीए-प्लैंकटनप्लस' और 'सीआईबीए-हॉर्टीप्लस' तैयार किये हैं। ये उत्पाद मछली के कचरे के वैज्ञानिक निपटान और मिट्टी की उर्वरता एवं कृषि उत्पादकता बढ़ाने वाले पर्यावरण-अनुकूल पोषक तत्वों की बढ़ती जरूरत, इन दोनों चुनौतियों से एक साथ निपटकर दोहरा फायदा पहुंचाते हैं।…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
तमिलनाडु जैव उर्वरक
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
06/06/26 07:02
पिछला अपडेट
06/06/26 07:02
स्थान
India