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मद्रास उच्च न्यायालय में तमिल को कामकाज की भाषा बनाने की मांग : एमएचएए ने 1965 के केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति के फैसले को दी चुनौती

चेन्नई, 01 नवंबर (वार्ता) संवैधानिक न्यायालयों (उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय) में हिंदी-अंग्रेजी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं को कामकाज भाषा के रूप में अस्वीकार करने वाले 1965 के केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति के निर्णय की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए 'मद्रास उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ' (एमएचएए) ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है। वर्ष 1965 के इस फैसले में हिंदी को प्राथमिकता देते हुए यह स्पष्ट किया गया था कि उच्चतम न्यायालय और सभी उच्च न्यायालयों की भाषा तब तक अंग्रेजी बनी रहनी चाहिए, जब तक कि हिंदी उसकी जगह न ले ले। एमएचएए के…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
न्यायालय तमिल कामकाज भाषा
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
01/11/26 18:34
पिछला अपडेट
01/11/26 18:34
स्थान
India