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भारत के गौरव के लिए देश के युवाओं का आत्मनिर्भर होना जरूरी: प्रथम हर्बल कुंभ में बाबा रामदेव

भारत के गौरव के लिए देश के युवाओं का आत्मनिर्भर होना जरूरी: प्रथम हर्बल कुंभ में बाबा रामदेव

मालाग्राम (पौड़ी), 06 नवंबर (वार्ता) पतंजलि समूह के प्रमुख एवं प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी रामदेव ने देश के युवाओं से पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण को छोड़कर अपनी सनातनी जड़ों की ओर लौटने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि भारत को विश्व में उसका पुराना गौरव दिलाने के लिए हमारे युवाओं का आत्मनिर्भर होना जरूरी है।

स्वामी रामदेव ऋषिकेश के निकट मालाग्राम में पतंजलि समूह द्वारा स्थापित किये जा रहे 'श्री धनवंतरि धाम' में 'हर्बल कुम्भ' नाम से आयोजित जड़ी-बूटी एवं प्राकृतिक कृषि मेले और 'धनवंतरि महोत्सव' के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह मेला चार-छह नवंबर तक चला। इसमें प्रारंभ से अंत तक जड़ी-बूटी एवं प्राकृतिक खेती तथा जल संरक्षण के घटकों पर चर्चा एवं प्रदर्शन, क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के साथ साथ योग-ध्यान एवं सांस्कृति कार्यक्रमों की गूंज बनी रही। कार्यक्रम को पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने भी संबोधित किया।

योग गुरु रामदेव ने समापन सत्र में देश के युवाओं से अपील की कि वे पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण को छोड़कर अपनी सनातनी जड़ों की ओर लौटें। उन्होंने कहा, "जब हमारा युवा आत्मनिर्भर होगा और अपनी संस्कृति पर गर्व करेगा, तभी भारत 'विश्वगुरु' के पद पर दोबारा आसीन हो सकेगा। उन्होंने कहा कि मालाग्राम का धनवंतरि धाम आने वाले समय में केवल चिकित्सा का केंद्र ही नहीं, बल्कि सनातन ज्ञान-विज्ञान का एक ऐसा वैश्विक मंदिर बनेगा, जहां दुनिया भर के लोग हिंदू संस्कृति की महानता से परिचित होंगे।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को एक समृद्ध 'हर्बल स्टेट' के रूप में विकसित करने की दिशा में यह पहल एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। बाबा रामदेव के नाम से प्रसिद्ध योग गुरु ने कहा, "आज जब पूरी दुनिया आधुनिकता के जाल में फंसकर बीमार हो रही है, तब सनातन का आयुर्वेद ही वैश्विक मानवता की रक्षा कर सकता है।" उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म की परम्पराओं में सनातन परंपरा सर्वोपरि है,क्योंकि यह सीधे हमारे वेदों और ऋषियों के ज्ञान से जुड़ी है।

उन्होंने कहा, हमारे ऋषि-मुनियों ने जंगलों और कंदराओं में रहकर जिन औषधियों की खोज की, वही सनातन का विज्ञान है। उन्होंने आह्वान किया कि हर हिंदू को अपने घर में तुलसी, गिलोय और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधों को स्थान देना चाहिए, क्योंकि यह केवल पौधे नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के जीवित प्रतीक हैं। योग गुरु ने कहा कि उत्तराखंड की पावन देवभूमि में आयोजित हर्बल कुंभ केवल कृषि और आर्थिकी के सुधार का मंच नहीं रहा, बल्कि यह हिंदू धर्म के मूल आधार सनातन धर्म की रक्षा और उसके पुनरुत्थान का एक महा-अभियान बनकर उभरा है।

उन्होंने हर्बल महाकुम्भ के मंच से देश और दुनिया को सनातन संस्कृति की सर्वोपरिता की याद दिलाते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति, आयुर्वेद और ऋषि-परंपरा को जीने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में प्रकृति को ईश्वर का रूप माना गया है। नदियों, पहाड़ों और वनस्पतियों की पूजा करना हमारे धर्म का मूल स्वभाव है। उन्होंने कहा, "आज यदि हम अपने पहाड़ों को बचाते हैं, औषधीय पौधों का संरक्षण करते हैं और जैविक कृषि (प्राकृतिक खेती) को अपनाते हैं, तो यह सीधे तौर पर सनातन धर्म की सबसे बड़ी सेवा होगी। भूमि को रसायनों से बचाना और गऊ-गंगा-गायत्री के प्रति समर्पित रहना ही आज के युग में वास्तविक धर्म रक्षा है।"

आचार्य बालकृष्ण ने घोषणा की कि हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए अब हर साल इस 'हर्बल कुंभ' का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि प्रकृति और विकास का एक ऐसा अनूठा संगम है, जो पहाड़ों में कृषि नवाचार के नये अध्याय लिखेगा। महोत्सव में उपस्थित सन्यासियों, ग्रामीणों और स्थानीय महिलाओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि पर्वतीय क्षेत्रों के युवा पारंपरिक खेती के स्थान पर औषधीय पौधों और हर्बल कृषि जैसे व्यावसायिक विकल्पों को अपनाएंगे, तो पहाड़ों से हो रहा पलायन पूरी तरह थम जाएगा। स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और कुटीर उद्योगों की स्थापना से उत्तराखंड की ग्रामीण आर्थिकी बेहद मजबूत होगी। हर्बल कुंभ के दौरान स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को जड़ी-बूटी की उन्नत खेती, जैविक कृषि, मिट्टी की गुणवत्ता जांच और डिजिटल कृषि की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, किसानों के उत्पादों को सही बाजार दिलाने के लिए एक विशेष क्रेता-विक्रेता (बायर्स-सेलर्स) सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिससे स्थानीय काश्तकारों को उनकी उपज का सीधा लाभ मिल सके।

महोत्सव के दौरान तीन दिनों तक चले वैदिक यज्ञ, अनुष्ठानों और शंखध्वनि से अनुनादित यमकेश्वर क्षेत्र के वातावरण में उपस्थित श्रद्धालुओं और संतों ने एक सुर में माना कि यह हर्बल कुंभ की यह शुरुआत आने वाले समय में सनातन धर्म की वैचारिक और व्यावहारिक रक्षा का एक नया अध्याय लिखेगा तथा भारतीय समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने की नई प्रेरणा देगा।

रतूड़ी, मनोहर वार्ता

समाचार विवरण:

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टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
हर्बल कुंभ रामदेव
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
06/11/26 11:27
पिछला अपडेट
06/11/26 11:27
स्थान
India