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शुभेंदु ने 'एंटी-गुंडा' विधेयक लौटाए जाने की खबरों को किया खारिज

शुभेंदु ने 'एंटी-गुंडा' विधेयक लौटाए जाने की खबरों को किया खारिज

कोलकाता, 26 सितंबर (वार्ता) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राज्य के विवादित 'गुंडा-रोधी' विधेयक को लौटा दिया है और कहा कि यह कानून अभी राष्ट्रपति तक पहुंचा ही नहीं है।

श्री अधिकारी ने शुक्रवार की रात राज्य सचिवालय में अचानक एक पत्रकार वार्ता बुलायी। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ये खबरें "फर्जी" हैं और विधेयक पर अभी केंद्रीय गृह मंत्रालय में प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा, "विधेयक अभी माननीय राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचा है। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव स्तर पर है। हमने दोपहर से ही इस बारे में विस्तार से जानकारी ली है। विधेयक अभी भी गृह मंत्रालय के पास है।"

मुख्यमंत्री की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उन खबरों के कुछ घंटे बाद हुई जिनमें कहा गया था कि राष्ट्रपति ने 'पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' (गुंडा-रोधी विधेयक) को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है और इसे राज्य सरकार को लौटा दिया है। इन खबरों के बाद विपक्ष ने आलोचना शुरू कर दी और तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस तथा अन्य दलों ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। इन खबरों को खारिज करते हुए श्री अधिकारी ने कहा: "नहीं, यह सब बेबुनियाद, फर्जी खबरें और अफवाहें हैं।

इस तरह की अफवाहें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं। विधेयक में कोई समस्या नहीं है।" मुख्यमंत्री ने साफ किया कि राष्ट्रपति द्वारा विधेयक लौटाए जाने की खबरें शायद नशीले पदार्थों से जुड़े प्रावधानों और मौजूदा स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) कानून के साथ उनके टकराव को लेकर हुई गलतफहमी की वजह से उड़ी हैं। उन्होंने ऐसी खबरें फैलाने वालों पर भी निशाना साधते हुए कहा, "बेमतलब की मनगढ़ंत बातें न लिखें। जाइए, खाना खाइए और सो जाइए।" राज्य विधानसभा से गत जून में पारित हुए इस बिल का मकसद असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ रोकथाम के उपाय करना है। इसमें "असामाजिक गतिविधियों" और "गुंडों" को परिभाषित करने के प्रावधान भी शामिल हैं।

इसमें तय वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर किसी व्यक्ति को एक साल तक के लिए किसी खास इलाके, शहर या जिले से बाहर निकालने का प्रावधान भी है। श्री अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित कानून के दो हिस्से थे। उनके मुताबिक संपत्ति ज़ब्त करने से जुड़ा प्रावधान पहले ही लागू किया जा चुका है, जबकि दूसरा हिस्सा राष्ट्रपति के पास भेजे जाने से पहले अभी प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा, "विधेयक के दो हिस्से थे। एक पहले ही लागू हो चुका है। दूसरा लागू किया जायेगा। विधेयक अभी राष्ट्रपति के पास नहीं गया है।" मुख्यमंत्री ने केरल और आंध्र प्रदेश में इसी तरह के कानूनों का ज़िक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों के लिए कुछ प्रावधानों को 'गैर-ज़मानती' बनाने के लिए राष्ट्रपति की मंज़ूरी मांग रही है।

श्री अधिकारी ने कहा, "नशीले पदार्थों के मामलों में, भारतीय न्याय संहिता में तीन साल की सज़ा और ज़मानत का प्रावधान है। हम इसे गैर-ज़मानती बनाना चाहते हैं। इसीलिए इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। सब कुछ नियमों के अनुसार किया जा रहा है। इसलिए, यह प्रक्रिया गृह मंत्रालय के ज़रिए चल रही है।" उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित कानून में "गुंडा" शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। राज्य सरकार ने गत जून में असामाजिक गतिविधियों को रोकने के मक़सद से विधानसभा में 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' पेश किया था।

विपक्ष की आलोचना के बावजूद मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि प्रस्तावित 'निवारक हिरासत कानून' का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से नहीं किया जायेगा। इस विधेयक में "असामाजिक गतिविधियों" को परिभाषित करने और किसी व्यक्ति को एक साल तक के लिए किसी खास इलाके, शहर या ज़िले से बाहर निकालने (निर्वासन) का प्रावधान है। ऐसा आदेश ज़िला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या पुलिस उप महानिरीक्ष (डीआईजी) रैंक के अधिकारी द्वारा जारी किया जा सकता है , हालांकि यह विधेयक पहले भी कानूनी जांच का विषय रहा है। राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को बताया कि वह राष्ट्रपति की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही है, जिसके बाद अदालत ने 6 अगस्त को इस कानून को चुनौती देने वाली तीन जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को समय से पहले दायर बताते हुए खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि अगर विधेयक को राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिल जाती है और उसे कानून के तौर पर अधिसूचित कर दिया जाता है, तो याचिकाकर्ता इसकी वैधता को फिर से चुनौती दे सकते हैं। इस बीच, विपक्ष के नेताओं ने इस विवाद को लेकर सरकार पर हमले जारी रखे। तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने इन घटनाक्रमों को सरकार के "रिवर्स गियर" में होने का सबूत बताया, जबकि कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेताओं ने भी प्रस्तावित कानून की ज़रूरत पर सवाल उठाए। इससे पहले शुक्रवार को श्री अधिकारी ने बर्दवान में कहा था कि सरकार कानूनी प्रावधानों की जांच करने के बाद आगे बढ़ेगी।

बाद में, आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "गुंडे अब डरे हुए हैं, इसीलिए वे ऐसी बातें कह रहे हैं। उन्हें जो कहना है, कहने दें। बाकी हम संभाल लेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि गुंडे डर में रहें और जेल जायें। मैंने अब तक जो भी कहा है, वह हुआ है और आगे भी होगा।"

सैनी अशोक वार्ता

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
859
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बंगाल शुभेंदु 'एंटी गुंडा' विधेयक
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
26/09/26 09:11
पिछला अपडेट
26/09/26 09:11
स्थान
India