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स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप 'सूर्य' का जलावतरण, नौसेना की बढ़ेगी मारक और रसद क्षमता

स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप 'सूर्य' का जलावतरण, नौसेना की बढ़ेगी मारक और रसद क्षमता

विशाखापत्तनम, 06 अक्टूबर (वार्ता) स्वदेशी समुद्री रक्षा क्षमताओं को ऐतिहासिक मजबूती प्रदान करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में नौसेना के पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-1) 'सूर्य' का औपचारिक जलावतरण किया।

इस मील के पत्थर के साथ ही उन्होंने पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-5) की आधारशिला रखी और शिपयार्ड की निर्माण क्षमता को दोगुना करने वाले अत्याधुनिक स्लिपवे-4 व 300 टन क्षमता की गोलियाथ क्रेन का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि इन तीनों उपलब्धियों का महत्व व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि एफएसएस1 का जलावतरण सफलता का प्रतीक है, एफएसएस5 की नींव रखा जाना दृढ़ संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड न केवल अपनी जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत कर रहा है, बल्कि भारत की समुद्री शक्ति की नींव को भी सशक्त कर रहा है। स्वतंत्र भारत में निर्मित पहले जहाज 'जल उषा' के 1948 में विशाखापत्तनम में जलावतरण को याद करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत की दीर्घकालिक समुद्री विरासत पर प्रकाश डाला और कहा कि देश का समुद्र से संबंध प्राचीन काल से है। उन्होंने एचएसएल को भारत की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक बताया और आठ दशकों से अधिक समय से देश की समुद्री और रक्षा आवश्यकताओं में इसके योगदान की सराहना की।

रक्षा मंत्री ने रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद एचएसएल के 2025 में मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्राप्त करने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, जो इसके रूपांतरण और निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। फ्लीट सपोर्ट शिप नौसेना की पहुंच और क्षमता को सुदृढ़ करेंगे। रक्षा मंत्री ने फ्लीट सपोर्ट शिप कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये पोत हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की पहुंच, क्षमता और परिचालन क्षमता को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक परिचालन करने वाली नौसेना को न केवल युद्धपोतों की बल्कि रसद, रखरखाव, निरंतर समर्थन और परिचालन क्षमता की भी आवश्यकता होती है। फ्लीट सपोर्ट शिप समुद्री आपूर्ति और नौसैनिक अभियानों को निरंतर समर्थन प्रदान करके यह आवश्यक क्षमता उपलब्ध कराते हैं।

रक्षा मंत्री ने एफएसएस-1 के शुभारंभ को नौसेना की परिचालन पहुंच और क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि एफएसएस-5 की नींव रखे जाने को भारत के समुद्री भविष्य के लिए एक और मजबूत आधारशिला बताया। एचएसएल द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित इस फ्लीट सपोर्ट शिप में उन्नत कार्गो एवं तरल पदार्थ परिवहन क्षमताएं, अत्याधुनिक रखरखाव कार्यशालाएं, बहु-भूमिका हेलीकॉप्टर संचालन के लिए एक समर्पित हेलीकॉप्टर डेक तथा आत्मरक्षा प्रणालियां शामिल होंगी। रक्षा मंत्री ने विशाखापत्तनम के रणनीतिक महत्व पर बल देते हुए कहा कि पूर्वी नौसेना कमान, नौसेना डॉकयार्ड, एचएसएल और विशाखापत्तनम बंदरगाह की उपस्थिति शहर को एक एकीकृत समुद्री तंत्र की नींव प्रदान करती है। उन्होंने नौसेना विशेषज्ञता, जहाज निर्माण क्षमता, इंजीनियरिंग प्रतिभा, बंदरगाह अवसंरचना और कुशल मानव संसाधन को एक साथ लाकर विशाखापत्तनम को एक प्रमुख समुद्री औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।

रक्षा मंत्री ने नौसेना, एचएसएल, डीआरडीओ, शिक्षा जगत, उद्योग, एमएसएमई और स्टार्टअप को शामिल करते हुए एक एकीकृत राष्ट्रीय समुद्री तंत्र की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की समुद्री शक्ति का निर्माण केवल नौसेना या शिपयार्ड से नहीं हो सकता, इसमें सभी हितधारकों के बीच तालमेल होना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा, "हमारा लक्ष्य सरल और स्पष्ट होना चाहिए- बेहतर डिज़ाइन करें, तेज़ी से निर्माण करें, समय पर डिलीवरी करें, कुशलतापूर्वक संचालन करें और प्रभावी ढंग से रखरखाव करें।" उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, जिसमें अत्याधुनिक प्रणालियों और प्लेटफार्मों के घरेलू डिजाइन व निर्माण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है।

उन्होंने समय पर डिलीवरी, उत्पादकता, स्वदेशी डिजाइन क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, कुशल जनशक्ति, क्षमता और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता को उन प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया जो भारत की जहाज निर्माण क्षमता को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में बदलने की क्षमता निर्धारित करेंगे। उन्होंने समय पर आपूर्ति को एक संगठनात्मक संस्कृति बनाने, अग्रणी वैश्विक जहाज निर्माताओं से सीखने, स्वदेशी निर्माण क्षमता को मजबूत करने, एमएसएमई और स्टार्टअप के साथ साझेदारी करने और क्रमिक विकास क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने नौसेना और शिपयार्डों के बीच प्रगाढ़ समन्वय के महत्व पर भी जोर दिया।

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत का उद्देश्य आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता तक पहुंच होना चाहिए। भारतीय शिपयार्डों को मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की सेवा करने तथा समुद्री प्रौद्योगिकी, जहाज मरम्मत एवं रखरखाव सेवाओं और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता में वैश्विक उपस्थिति विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। इन कार्यक्रमों में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, आंध्र प्रदेश के सड़क, भवन, अवसंरचना एवं विकास मंत्री श्री जनार्दन रेड्डी, विशाखापत्तनम के सांसद भारत मथुकुमिल्ली, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला, पूर्वी तट के तटरक्षक कमांडर अपर महानिदेशक डोनी माइकल, एचएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल सी रघुराम (सेवानिवृत्त) और नौसेना तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

शोभित.श्रवण वार्ता

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टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
राजनाथ शिप सूर्य जलावतरण
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
06/10/26 13:49
पिछला अपडेट
06/10/26 13:49
स्थान
India