पंचकूला, 22 सितंबर (वार्ता अब ग्राहक एक नज़र में ही पहचान सकेंगे कि साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज़ शाकाहारी हैं या मांसाहारी, क्योंकि केंद्र सरकार ने इनकी पैकेजिंग पर रंग-कोड वाले लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) चौथा संशोधन नियम, 2026' अधिसूचित किया है।
इसके तहत शाकाहारी उत्पादों के लिए हरे बिंदु (ग्रीन डॉट) और मांसाहारी उत्पादों के लिए (जहां लागू हो) लाल या भूरे बिंदु (रेड और ब्राउन डॉट ) का निशान लगाना ज़रूरी है। यह पहचान चिह्न पैकेज्ड साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और अन्य कॉस्मेटिक्स एवं टॉयलेटरीज़ के मुख्य डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से पर दिखना चाहिए। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने सोमवार को जीएसआर 826(ई) के ज़रिए इस संशोधन की अधिसूचना जारी की और यह आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो गया। यह कदम पर्सनल-केयर उत्पादों के लिए स्पष्ट रूप से दिखने वाली जानकारी की ज़रूरत को पूरा करता है, जिससे ग्राहक केवल सामग्री की सूची पर निर्भर रहे बिना शाकाहारी और मांसाहारी उत्पादों के बीच अंतर कर सकेंगे।
सरकार ने लेबलिंग का नया प्रावधान जोड़कर 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011' के नियम 6 में संशोधन किया है। इस अधिसूचना में नियम 6 के उप-नियम (8) को भी हटा दिया गया है। यह बदलाव उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जो कॉस्मेटिक्स और पर्सनल-केयर उत्पादों में इस्तेमाल सामग्री के स्रोत के आधार पर खरीदारी का फ़ैसला करते हैं। निर्माताओं और पैकर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि संशोधित नियमों के अनुसार, संबंधित उत्पादों की पैकेजिंग के मुख्य प्रदर्शन पैनल पर ज़रूरी रंग-कोड वाला लेबल या जानकारी मौजूद हो।
सैनी वार्ता