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जम्मू की समाजशास्त्री ने सीमावर्ती ग्रामीणों के संघर्षों को किया उजागर

जम्मू 15 अप्रैल (वार्ता) एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती गांवों के ग्रामीण अपने ही देश में रहने के बावजूद अधिकारों के अभाव के कारण खुद को शरणार्थी एवं विस्थापित महसूस करते हैं और इन सीमावर्ती समुदायों के लिए भूमि अधिकार, सुरक्षा तथा आजीविका के साधनों का समाधान ही उनके समावेशी विकास का एकमात्र मार्ग है। जम्मू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की पूर्व प्रमुख प्रोफेसर आभा चौहान भारत-पाक सीमा के पास खौर और अखनूर सेक्टरों के अपने दस दिवसीय दौरे के बाद सीमावर्ती निवासियों के कठिन जीवन और उनके अधिकारों के संघर्ष को…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
जम्मू ग्रामीण संघर्ष अध्ययन
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
15/04/26 00:00
पिछला अपडेट
15/04/26 00:00
स्थान
India