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नव रसों की बौछार में देर रात तक खूब जमा राजस्थानी कवि सम्मेलन

बारां, 27 सितम्बर (वार्ता) राजस्थान के बारां जिले में ऐतिहासिक डोल मेले का रंगमंच शनिवार की रात हाड़ौती की माटी की महक, ठेठ राजस्थानी अंदाज और कविता के नव रसों से सराबोर रहा। हाड़ौती के ख्यातनाम कवियों ने हास्य, शृंगार, वीर, करुण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं की ऐसी बौछार की, कि देर रात तक पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा। कवि सम्मेलन का शुभारंभ सूत्रधार पवन गोचर ने मां सरस्वती की वंदना से किया। उन्होंने श्रृंगार रस को हाड़ौती के ठेठ अंदाज में पिरोते हुए 'थारे काई हो गयो रूपाली, काया सूखती जारी, फिर भी गुटखा खा…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
राजस्थान कवि सम्मेलन बारां
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
27/09/26 13:02
पिछला अपडेट
27/09/26 13:02
स्थान
India