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बीआरआईसी-राजीव गांधी जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के शोधकर्ताओं ने पार्किंसंस रोग की शुरुआती पहचान के लिए विकसित किए नए नैनोपोर सेंसर

तिरुवनंतपुरम, 29 अगस्त (वार्ता) बीआरआईसी-राजीव गांधी जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र (बीआरआईसी-आरजीसीबी) के शोधकर्ताओं ने नैनोपोर-आधारित एक नवीन सेंसर तकनीक विकसित की है, जो पार्किंसंस रोग और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) जैसे तंत्रिका अपक्षयी रोगों से जुड़े जैव-चिह्नकों की शीघ्र पहचान और निगरानी में सहायक हो सकती है। जैव-चिह्नक (बायोमार्कर) रोगों के जैविक संकेतक होते हैं, जो उनकी शुरुआती पहचान में मदद कर सकते हैं। हालांकि, पारंपरिक तकनीकों से शुरुआती चरण में ऐसे जैव-चिह्नकों की पहचान करना अब भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इनमें से कई की मात्रा बेहद कम होती है। इस कमी को दूर करने के लिए डॉ. महेंद्रन के. आर. के…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
शोधकर्ता पार्किंसंस रोग
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
29/08/26 06:22
पिछला अपडेट
29/08/26 06:22
स्थान
India