वैश्विक कमी के बीच यूरोपीय देश आपातकालीन स्टॉक से 'भारी मात्रा' में डीजल जारी करने पर सहमत : ट्रंप

वाशिंगटन, 03 अक्टूबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि जी7 नेताओं की एक आपातकालीन बैठक के बाद यूरोपीय देश बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए अपने रणनीतिक भंडार से "भारी मात्रा" में डीजल जारी करने पर सहमत हो गये हैं।
ईंधन की आपूर्ति और आसमान छूती कीमतों पर चर्चा के लिए यह वीडियो कॉन्फ्रेंस श्री ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद बुलायी गयी थी। श्री ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय डीजल भंडार से आपूर्ति "तुरंत" शुरू हो जायेगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "यूरोप अपने भारी मात्रा में जमा डीजल तेल के स्टॉक से बड़ा हिस्सा जारी करने पर सहमत हो गया है।"
पेरिस स्थित एलिसी पैलेस की ओर से जारी संयुक्त बयान में पुष्टि की गयी कि जी7 सदस्य और साझेदार देश चार महीनों में 10 करोड़ बैरल ईंधन जारी करने पर समन्वय करेंगे। इस योजना के तहत शुरुआती 20 दिनों के भीतर ही डीजल का एक बड़ा हिस्सा जारी किया जायेगा। ह्वाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि श्री ट्रंप ने गुरुवार रात श्री मैक्रों से बात की और शुक्रवार सुबह जी7 नेताओं के साथ बैठक कर इस समझौते पर बातचीत की। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने भी इस वीडियो कॉन्फ्रेंस की एक तस्वीर साझा की।
जी7 समूह में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं, जबकि यूरोपीय संघ एक गैर-सूचीबद्ध सदस्य के रूप में इसमें भाग लेता है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब श्री ट्रंप ने अमेरिकी डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें और अधिक बढ़ने की आशंका थी। जी7 के बयान में हालांकि इस धमकी का सीधा जिक्र नहीं किया गया, लेकिन सभी सदस्यों से निर्यात प्रतिबंधों से बचने का आग्रह किया गया।
बयान में कहा गया, "हम जी7 देशों के बीच ऊर्जा और ऊर्जा उत्पादों पर निर्यात प्रतिबंध न लगाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं और सभी उत्पादकों से ऐसे प्रतिबंधों से बचने का आह्वान करते हैं, जो बाजार में तनाव को बढ़ा सकते हैं।" अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण चिद्यालयों, किसानों और छोटे व्यवसायों की लागत काफी बढ़ गयी है। किसान कृषि मशीनरी चलाने के लिए डीजल पर निर्भर हैं, जबकि निर्माण कंपनियों, फूड बैंकों और अन्य उद्यमों ने अपने वाहनों व डिलीवरी ट्रकों को चलाने में अधिक खर्च की सूचना दी है।
आलम वार्ता

