चुनाव पैनल के बचाव में जारी प्रेस नोट को पूरे चुनाव आयोग की मंजूरी थी : ईसीआई

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) चुनाव आयोग गुरुवार को यह स्पष्ट किया कि बुधवार को आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जारी प्रेस नोट पूरे आयोग की मंजूरी से जारी किया गया था जो तीनों चुनाव आयुक्तों की सामूहिक स्थिति को दर्शाता है।
एक सवाल के जवाब में कि क्या 23 सितंबर को जारी प्रेस नोट संख्या 119 क्या आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से जारी किया गया था, चुनाव आयोग ने कहा: "इस तरह के समान सवालों के संदर्भ में यह स्पष्ट किया जाता है कि 23/09/2026 को जारी प्रेस नोट संख्या 119 को पूर्ण निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बाद जारी किया गया था।" चुनाव आयोग ने आगे कहा कि पूरे आयोग की मंजूरी लेने के बाद प्रेस नोट जारी करना उसकी नियमित संस्थागत परंपरा है।
यह स्पष्टीकरण तब आया है जब तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग के कामकाज की कड़ी जांच हो रही है और चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। खासकर तब जब आयोग ने बुधवार को मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर हुई आलोचना और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों पर विस्तृत जवाब दिया है।
बुधवार को जारी प्रेस नोट में, ईसीआई ने इस बात पर बल दिया था कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, कानूनी नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाली एक संवैधानिक संस्था है। उसने यह भी कहा कि आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था के रूप में काम करता है और अपने कामकाज को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक एवं कानूनी दायरे में रहकर फ़ैसले लेता है।
चुनाव आयोग द्वारा गुरुवार को दी गई सफाई में विशेष रूप से उन सवालों का जवाब दिया गया कि क्या प्रेस नोट नंबर 119 पूरे तीन-सदस्यीय आयोग की राय शामिल थी। ईसीसआई ने कहा कि इसे पूरे आयोग की मंज़ूरी से जारी किया गया था और यह भी कहा कि यह प्रेस नोट जारी करने की उसकी आम प्रक्रिया के अनुसार ही था।
अभय, मधुकांत वार्ता

