जमुई में छात्रा से बदसलूकी करने वालों पर पॉक्सो के तहत हो कार्रवाई : खरगे-राहुल

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (वार्ता) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार के जमुई में दसवीं कक्षा की छात्रा के साथ बदसलूकी करने वालों के खिलाफ पॉक्सो के तहत मुकदमा चलाकर जल्द से जल्द उन्हें सजा देने की मांग की और कहा कि इस तरह की घटनाओं में राज्य सरकार की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
श्री खरगे ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि बिहार के जमुई में छात्रा के साथ शर्मनाक घटना हुई है। इससे पहले दिल्ली में 17 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई। ऐसी वारदातें भाजपा के 'नारी शक्ति वंदन' और 'बेटी बचाओ' के दावों का पर्दाफाश करती हैं। कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और राज्य सरकारों की जवाबदेही तय हो।
श्री गांधी ने कहा कि बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है। दसवीं कक्षा के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित और अपमानित किया गया तथा छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ जोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर अपराधी उसके साथ गलत तरीके से व्यवहार करते और खींचातानी करते रहे। उन्होंने सवाल किया कि इन लोगों को ऐसी बदतमीजी करने का हक किसने दिया। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और अपराधियों पर पॉक्सो के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि यह घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं। उन्होंने बिहार सरकार से जवाब मांगा कि शाम सात बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि जमुई की घटना इतनी भयावह है कि सोशल मीडिया एक्स घटना के दृश्यों वाले पोस्ट को प्रतिबंधित कर रहा है, जिसमें उनका अपना पोस्ट भी शामिल है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की सेंसरशिप वास्तविकता को छिपा नहीं सकती।
श्री खेड़ा ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा करने वालों के खिलाफ दृढ़ता दिखाते हुए मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की होती तो जवाबदेही और अपराध रोकने का स्पष्ट मानक स्थापित किया जा सकता था। उनके अनुसार आरोपियों को बचाने और उन्हें राजनीतिक तथा संस्थागत संरक्षण देने के प्रयासों से ऐसा माहौल बनता है जिसमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा सामान्य होती जाती है।
अभिनव, मधुकांत वार्ता

