संस्कृत विश्व की महत्वपूर्ण ज्ञानभाषा, भारत के प्राचीन ज्ञान में विश्व के लिए है शांति का संदेश: डॉ करण सिंह

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (वार्ता) प्रख्यात विद्वान एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. करण सिंह ने शुक्रवार कहा कि संस्कृत विश्व की महत्वपूर्ण ज्ञानभाषा है और भारत अपनी प्राचीन ज्ञान परम्परा, योग, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश दे सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऐसे ग्रन्थों के लेखन, प्रकाशन और प्रसार की आवश्यकता है, जो वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को व्यापक स्तर पर स्थापित करें। डॉ. सिंह यहां केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के 56वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने 'रघुकुलसंपदा' ग्रन्थमाला के अंतर्गत नवीन तंत्र ग्रन्थमाला तथा 'धर्मचक्रप्रवर्तक' से संबंधित ग्रन्थों का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने की। इस अवसर पर कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रो कमल किशोर मिश्र, प्रो वसंत कुमार भट्ट विशिष्ट रुप से उपस्थित थे। अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने प्राचीन भारतीय ग्रन्थों और हस्तलिखित पाण्डुलिपियों के संकलन, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण पर बल देते हुए कहा कि इससे भारत की समृद्ध ज्ञान परम्परा को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।
उन्होंने महाराजा हरि सिंह के प्रयासों से प्राचीन पाण्डुलिपियों के संकलन और उनके प्रकाशन की परम्परा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ज्ञान भारतम् जैसी पहल प्राचीन ज्ञान-संपदा के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि योग की तरह संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन भी विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकते हैं।
कुलपति श्री वरखेडी ने कहा कि संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन में डॉ. सिंह का योगदान अविस्मरणीय है। उनका व्यक्तित्व भारतीय सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परम्परा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने 'मम भाषा संस्कृतम्' अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है। आचार्य कमल किशोर मिश्र ने इस अवसर पर नवीन तंत्र ग्रन्थमाला के नौ ग्रन्थों की विषयवस्तु और महत्त्व पर प्रकाश डाला। साहित्यकार प्रो. वसंत कुमार भट्ट ने 'धर्मचक्रप्रवर्तक' का परिचय प्रस्तुत किया।
मनोहर.श्रवण वार्ता

