डॉ. गुप्ता ने चिकित्सकों के प्रशिक्षण पर दिया बल, कहा - साइबरनाइफ तकनीक से बिना चीर-फाड़ 2500 से अधिक मरीज हुए स्वस्थ

नयी दिल्ली, 15 सितंबर (वार्ता) आर्टेमिस हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉ. आदित्य गुप्ता ने कहा कि किसी चिकित्सक या सर्जन के लिए प्रशिक्षण और दक्षता का महत्व सबसे ज्यादा होता है। बदलती तकनीक के साथ वे आधुनिक और अधिक उन्नत उपकरणों का प्रयोग करते हैं, जिससे मरीज लाभान्वित होते हैं। साइबरनाइफ ऐसी ही एक तकनीक है, जिसकी मदद से जटिल बीमारियों से ग्रस्त 2,500 से ज्यादा मरीज आर्टेमिस हॉस्पिटल में इलाज करवाकर स्वस्थ हो चुके हैं।
गुरुग्राम स्थित आर्टेमिस हॉस्पिटल ने न्यूरोसाइंसेज के क्षेत्र में हो रही प्रगति और जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में टीमवर्क (चिकित्सकों, शल्य चिकित्सकों, रेडियोलोजिस्ट आदि का मिलकर काम करना) की भूमिका को लेकर मंगलवार को नयी दिल्ली में जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में न्यूरोसर्जरी, रेडियोसर्जरी और आधुनिक न्यूरोलॉजिकल उपचारों के साथ मरीजों के लिए उपलब्ध नयी तकनीकों पर चर्चा की गई। सत्र का नेतृत्व आर्टेमिस हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी के चेयरमैन और साइबरनाइफ केंद्र के सह-प्रमुख डॉ. गुप्ता ने किया। उन्होंने डीप ब्रेन स्टिमुलेशन, साइबरनाइफ रेडियोसर्जरी और मिर्गी के आधुनिक उपचार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मरीज की स्थिति के अनुसार सही जांच और उपचार का चयन बेहतर परिणामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। डॉ. गुप्ता ने कहा, "न्यूरोसाइंसेज में आधुनिक तकनीकों ने जटिल बीमारियों के इलाज की संभावनाओं को काफी बढ़ाया है। डीप ब्रेन स्टिमुलेशन कुछ चुनिंदा मरीजों में गति विकार (मूवमेंट डिसऑर्डर) के उपचार का महत्वपूर्ण विकल्प है, वहीं साइबरनाइफ रेडियोसर्जरी दिमाग और रीढ़ की कई बीमारियों में बिना पारंपरिक सर्जरी के अत्यधिक सटीक उपचार उपलब्ध कराती है। तकनीक के साथ टीम वर्क का भी बहुत महत्व होता है। न्यूरोसर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, रेडिएशन विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञों की संयुक्त विशेषज्ञता ही व्यापक और मरीज केंद्रित उपचार सुनिश्चित करती है।" सत्र में मिर्गी के कारणों, सटीक जांच और उपचार विकल्पों पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि मरीज की स्थिति के आधार पर दवाओं से लेकर सर्जरी और अन्य आधुनिक उपचारों पर विचार किया जा सकता है। इस दौरान ब्रेन ट्यूमर से सफलतापूर्वक ठीक हुए एक बच्चे के केस का वीडियो भी दिखाया गया। डॉ. आदित्य गुप्ता ने कहा, "हर न्यूरोलॉजिकल मरीज की स्थिति अलग होती है और इसलिए टीमवर्क आधुनिक तंत्रिका विज्ञान उपचार का आधार है। कई विशेषज्ञ जब एक साथ मरीज की स्थिति का अलग-अलग दृष्टिकोण से आकलन करते हैं, तभी सबसे उपयुक्त उपचार रणनीति तैयार की जा सकती है। आर्टेमिस हॉस्पिटल में अब तक 2,500 से अधिक साइबरनाइफ प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। साइबरनाइफ तकनीक लक्षित स्थान पर अत्यधिक सटीक रेडिएशन पहुंचाने में मदद करती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को पहुंचने वाले नुकसान को काफी कम करने में सहायक होती है। सत्र का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बेहतर प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक के साथ विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच मजबूत समन्वय और मरीजों में जागरूकता जरूरी है। आर्टेमिस हॉस्पिटल अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और मल्टीडिसिप्लिनरी टीमवर्क के माध्यम से तंत्रिका संबंधी जटिल स्थितियों के लिए व्यापक उपचार उपलब्ध कराने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है। मनोज शोभित वार्ता

