दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की योजना पांच साल बढ़ी

नयी दिल्ली, 04 नवंबर (वार्ता) सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) योजना को पांच साल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 3788.04 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 2353.15 करोड़ रुपये और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की हिस्सेदारी 1434.89 करोड़ रुपये होगी। केंद्र का हिस्सा निर्भया फंड से दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत देशभर में विशेष अदालतों की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 की जायेगी। इनमें दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई करने वाली फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के लिए विशेष रूप से गठित अदालतें शामिल होंगी। नये जिलों में अदालतों का विस्तार वहां लंबित दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की संख्या के आधार पर किया जाएगा। योजना का उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाना, लंबित मुकदमों का बोझ कम करना और पीड़ित महिलाओं एवं बच्चों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक फास्ट ट्रैक विशेष अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था होगी। विशेष लोक अभियोजक को संबंधित अदालत में मामलों की प्रभावी और त्वरित पैरवी के लिए नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार योजना में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अदालतों के संचालन से संबंधित खर्चों के लिए निर्धारित वित्तीय पैटर्न के तहत सहायता उपलब्ध करायेगी। इससे अदालतों के प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाने और पुराने मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह योजना दो अक्टूबर 2019 को शुरू की गयी थी। इसकी शुरुआत आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के प्रावधानों और 25 जुलाई 2019 को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गयी थी। उच्चतम न्यायालय ने उन जिलों में पॉक्सो अधिनियम के तहत विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था, जहां ऐसे 100 से अधिक मामले लंबित थे। शुरुआत में यह योजना एक वर्ष के लिए लागू की गई थी, लेकिन बाद में इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। अब इसे अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी गयी है।
आजाद अशोक वार्ता

