भविष्य गढ़ने वाली तकनीकों के विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान का आधार मजबूत कर रहा है भारत: मोदी

नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक संस्थानों को वर्तमान की जरूरत के समाधान विकसित करने के साथ साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करने का आह्वान करते हुए मंगलवार को कहा कि भारत ऐसी तकनीकों के विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान का आधार मजबूत कर रहा है जो भविष्य गढ़ने वाली हैं।
श्री मोदी ने समीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी , उन्नत सामग्री, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और अगली पीढ़ी की संचार प्रणालियों जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा " ये ऐसे क्षेत्र हैं जो भविष्य को गढ़ेगे। भारत इन क्षेत्रों में मजबूत वैज्ञानिक आधार तैयार कर रहा है। इसके लिए अलग-अलग राष्ट्रीय मिशन भी शुरू किए गए हैं। " श्री मोदी यहां - विज्ञान , प्रौद्योगिकी और नवचार के उभरते क्षेत्रों के सम्मेलन (ईएसटीआईसी-2026) के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह , सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय सूद , नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विभिन्न देशों के वैज्ञानिकगण, अनुसंधानकर्ता और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एवं उद्यमी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमारा प्रयास है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के इन क्षेत्रों में नए नयी कामयाबी के समाचार भारत से भी आएं।हमारी जिम्मेदारी केवल नवाचार तक सीमित नहीं है। कृत्रिम मेधा हो, सिंथेटिक बायोलॉजी हो या स्वायत्त प्रणालियां, इनमें सावधानी और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।" उन्होंने एआई आधारित ऐसे उपाय निकालने , ऐसे क्वांटम सुरक्षा समाधान विकसित करने की जरूरत पर बल दिया जिससे आनलाइन खतरों से देश की व्यवस्था पुख्ता हिफाजत की जा सके।
श्री मोदी ने कहा "आप सभी जानते हैं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की दुनिया में हमेशा से एक चुनौती रही है, इसे हथियार के रूप में देखा जाना। जबकि भारत की सोच है कि ये मानवता की सेवा का माध्यम हैं।विज्ञान की असली सफलता तब होती है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर सामान्य नागरिक के जीवन को बेहतर बनाती है।" श्री मोदी ने कहा, " आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारे पास प्रतिभा है। कुछ नया करने का संकल्प है। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में केवल भागीदार न हो, बल्कि उसका नेतृत्व करे। हमारा विश्वास है कि हम ऐसा कर के रहेंगे।" उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य ऐसी प्रौद्योगिकियों का विकसित करना है, जो भारत को सशक्त करें और मानवता की समस्याओं के समाधान में भी योगदान दें।
श्री मोदी ने कहा " दशकों पहले एक समय था, जब भारत के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का मतलब था दूसरों का पीछा करना। दुनिया में कुछ नया होता था, तो कुछ साल बाद वह टेक्नोलॉजी हम तक पहुंचती थी। हम उसे अपनाते थे या उसमें कुछ छोटे मोटे सुधार करके आगे बढ़ा देते थे। लेकिन आज 21वीं सदी का भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब हमारा लक्ष्य भारत के लिए, दुनिया के लिए, आज के लिए, आने वाले कल के लिए, नई टेक्नोलॉजी बनाना, उसकी दिशा तय करना और दुनिया की समस्याओं के समाधान देने की शक्ति विकसित करना है।" इसी संबंध में उन्होंने भारत में कोराना वैक्सीन का विकास और उत्पादन कर बड़े सस्तर पर उसे दुनिया भर में भेजे जाने तथा मंगल ग्रह तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पर पहुंचने में देश की सफलता का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ' हम चंद्रमा के उस साउथ पोल पर पहुंचते हैं, जहां कोई नहीं पहुंच पाया और इसलिए ही मेरा विश्वास है - भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकी को अनिवार्य रूप से अपना चाहिए,साहस के साथ नव प्रवर्तन करना चाहिए और उनका सृजन करने में विश्व का नेतृत्व करना चाहिए।" प्रधानमंत्री ने कहा, " शून्य की खोज से लेकर अंक प्रणाली और खगोल विज्ञान तक भारत की परंपरा ज्ञान और खोज की रही है। आज हम अपनी इसी वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक टेक्नोलॉजी और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।"
उन्होंने विकसित भारत के निर्माण के लिए परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि देश फास्ट ब्रीडर रिऐक्टर पर तेजी से काम कर रहा है और 500- मेगावाट क्षमता का एक रिऐक्टर नमूने के तौर पर चालू कर चुका है। उन्होंने इसे परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अत्यंत बड़ा और महत्वपूर्ण सफलता बताया। श्री मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित करने से पहले वहां कुछ स्टार्टअप उद्यमियों के उत्पादों की प्रदर्शनी देखी और उनसे बातचीत की । उन्होंने कहा, ' आज भारत के युवा जिस स्केल पर सोच रहे हैं, जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वो उत्साह बढ़ाने वाला है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी शक्ति और अपना भरोसा, दोनों बढ़ा रहा है। भारत का एक और सामर्थ्य है, समाधानों को विशाल पैमाने पर ले जाना। भारत में कोई समाधान सफल होता है, तो उससे दुनिया के अनेक देशों की समस्याओं का समाधान होने का रास्ता भी बनता है। इसी संबंध में उन्होंने डिजिटल मंचों और 5जी संचार प्रौद्योगिकी का विशेष रूप से उल्लेख किया।
मनोहर जितेन्द्र वार्ता

