मोदी ने साइबर अपराधों की रोकथाम की वैश्विक व्यवस्था बनाने की अपील की, भारत के अनुभवों को साझा करने का प्रस्ताव किया

नयी दिल्ली, 08 अक्टूबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइबर (इंटरनेट) क्षेत्र में अपराध और धोखाधड़ी को प्रौद्योगिकी के विस्तार की राह में एक बड़ी चुनौती बताते हुए गुरुवार को दुनिया की सरकारों और उद्योग जगत से साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम की एक वैश्विक व्यवस्था बनाने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस दिशा में अपने अनुभवों का लाभ साझा करने को तैयार है। श्री मोदी ने यहां यशोभूमि में 7-10 अक्टूबर तक आयोजित भारत की 10वीं इंडिया मोबाइल कांग्रेस का औपचारिक उद्घाटन कर रहे थे। समारोह में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी, विभिन्न राज्यों के मंत्री, मोबाइल दूरसंचार सेवा कंपनियों के वैश्विक फोरम -ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्यूनिकेशन एसोसिएशन (जीएसएमए) के संचालन मंडल के सदस्य, दुनिया भर से आए दूरसंचार सेवा एवं उपकरण कंपनियों के प्रतिनिधि विशेषज्ञ, विद्यार्थी और स्टार्टअप क्षेत्र के उद्यमी शामिल थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी बड़े पैमाने पर तभी पहुंचती है, जब वह लोगों का भरोसा हासिल कर लेती है। आप सभी जानते हैं कि साइबर फ्राड और साइबर क्राइमभी सीमाएं नहीं मानते, वे पहले ही बाउंड्री के बाहर चले गए हैं। एक देश में बैठा व्यक्ति, किसी दूसरे देश की मदद से, किसी तीसरे देश में क्राइम कर सकता है। डीप-फेक्स कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है, ये भी हम देख रहे हैं।"
श्री मोदी ने कहा, " इसलिए जरूरी है कि हम इसके लिए एक वैश्विक नियम-कायदे बनाने पर काम करें। सरकारें, प्रौद्योगिकी कंपनियां, दूरसंचार ऑपरेटर और वित्तीय संस्थाएं, सभी को इस व्यवस्था से जुड़ना होगा।" प्रधानमंत्री ने जीएसएमए और दुनिया भर की दूससंचार सेवा कंपनियों से साइबर अपराध के खिलाफ ऐसी वैश्विक व्यवस्था कायम करने का आह्वान किया जिसमें-साइबर धोखेबाजों को लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोक जासके।
उन्होंने कहा, " भारत ने इस दिशा में अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखा है,और भारत अपने अनुभवों को विश्व के साथ शेयर करने के लिए हमेशा तैयार है।" उन्होंने कहा कि आज जब टेलीकॉम और डिजिटिल टेक्नोलॉजी का इतना महत्व है, तब इससे जुड़ी सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को भी चाक-चौबंद करना बहुत आवश्यक है। यह हम सभी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, " एक सामान्य नागरिक प्रोटोकॉल या आर्किटेक्चर की भाषा में नहीं सोचता, उसके लिए भरोसा बहुत अहम है। जब उसको फोन पर आए, तो उसे पता हो कि कॉल कौन कर रहा है। जब मैसेज आए, तो उसे पता हो कि वह असली है या फर्जी। जब भुगतान हो, तो उसे विश्वास हो कि उसका पैसा सुरक्षित है। जब वह किसी फॉर्म में अपना डेटा दे, तो उसे विश्वास हो कि उसका डेटा सुरक्षित है।"
बीते दशक में भारत के दू-दराज के इलाकों तक में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और इस पर आधारित अर्थव्यस्था के तीव्र विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि का निरंतर विस्तार हुआ है। उन्होंने किा कि डेटा सस्ता होने से अर्थव्यवस्था के नए क्षेत्र का भी निर्माण हुआ है। इससे टेक्नोलॉजी, मनाेरंजन और शिक्षा नए उपभोक्ता, और नए सृजनकार्ताओं की भी एक नयी पीढ़ी तैयार हुई है। उन्होंने डिजिटल गेमिंग सेक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में 50 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी तरह से गेमिंग पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हैं। इसमें बहुत बड़ी संख्या छोटे और मझोले शहरों - कस्बों के युवाओं की है। वे ई-स्पोर्ट में भी मुकाबला कर रहे है, कन्टेन्ट बना रहे हैं और नए गेमिंग कारोबार खड़े हो रहा है। यानी भारत में मोबाइल फोन आज गेमिंग कन्सोल भी है और कंटेट क्रियेशन स्टूडियो भी बन गया है। उन्होंने कहा, " भारत में हुई टेलीकॉम क्रांति ने यही बदलाव डिजिटल कंटेट की दुनिया में भी ला दिया है। बेहतर, तेज कनेक्टिविटी और सस्ते डेटा ने अनेक वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स को, सोशल मीडिया और क्षेत्रीय ओटीटी को गांव-कस्बों तक पहुंचा दिया है।
उन्होंने कहा कि इससे भाषा से जुड़ी बंदिशें दूर हो गई हैं। यानी केवल कंटेंट क्रिएशन से जुड़ी इंडस्ट्री ही भारत में आज हज़ारों करोड़ रुपए की हो गई है, जिससे लाखों-लाख लोगों को कमाई हो रही है। यानी मोबाइल फोन ने भारत में कंटेंट क्रिएशन का भी लोकतांत्रीकरण कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस के इस एडिशन में अब आप जो चर्चा करेंगे, वे अगले दशक के रोडमैप को सशक्त करेगा। और ये रोडमैप भारत के साथ ही पूरे विश्व के मोबाइल मार्केट को दिशा देगा। बीते वर्षों में भारत ने उपभोक्ता से सृजनकर्ता बनने की यात्रा तय की है। अब भारत, उस लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है, जहां उत्पद डिजाइन भी भारत में होगा, उसकी प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा भी भारत की होगी। इसके लिए हर जरूरी प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, हर जरूरी सुधार किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में भी रिफॉर्म एक्सप्रेस तेजी से आगे बढ़ाया है। दशकों पुराने कानूनों को हम आधुनिक बना रहे हैं। एजीआर और बैंक गारंटीज जैसे बुनियादी बोझों को तर्कसंगत किया गया है और गतिशक्ति संचार पोर्टल ने राइट ऑफ वे की मंजूरियों को डिजिटल माध्यम से और तेज़ बनाया है।
श्री मोदी ने कहा कि भारत भारत टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े हर क्षेत्र में बड़े कदम उठा रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम भी रफ्तार पकड़ रहा है। अब तक पांच जगह सेमीकंडक्टर का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है। अगले चरण में भारत का फोकस पूरी सप्लाई चेन पर है। उन्होंने कहा, " हमारे सामने विकसित भारत का एक विराट संकल्प है, इसके लिए हमें अपने प्रयासों को निरंतर व्यापक करते रहना है।
उन्होंने कहा इस आयोजन में जो प्रौद्योगिकी दशायी गयी हैं, उनका अपना महत्व है, लेकिन इस इंडिया मोबाइल कांग्रेस को उन भागेदारियों के लिए याद किया जाए, जो यहां बनीं हैं। उन अनुसंधान परियोजनाओं के लिए याद किया जाए, जो यहां शुरू हुए हैं, उन उत्पादों के लिए याद किया जाए, जो यहां से दुनिया तक पहुंचे हैं, और उन नवाचारों के लिए याद किया जाए, जिन्होंने भारत से निकलकर मानवता की सेवा की।...हमें आईएमसी को एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना है, जो टेक्नोलजी, रिसर्च, इंडस्ट्री, इन्वेस्टमेंट और आइडिया का एक जंक्शन बन सके।"
मनोहर.श्रवण वार्ता

