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हिन्द महासागर में सबसे पहले मदद का हाथ बढाने वाला भारत पसंदीदा सुरक्षा साझेदार : राजनाथ

हिन्द महासागर में सबसे पहले मदद का हाथ बढाने वाला भारत पसंदीदा सुरक्षा साझेदार : राजनाथ

नयी दिल्ली ,29 सितंबर (वार्ता) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में आपदा या संकट के समय सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाने वाले तथा पसंदीदा सुरक्षा साझेदार की भूमिका निभा रहा है लेकिन रणनीतिक स्थिति के मद्देनजर उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ रही है और नौसेना को समुद्री क्षेत्र में बदलती चुनौतियों के मद्देनजर निगरानी तथा जवाबी तंत्र को मजबूत बनाने की जरूरत है।

श्री सिंह ने मंगलवार को यहां भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन के दूसरे आयोजन को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर में भारतीय युद्धपोतों की मौजूदगी देश की 'समुद्र ' में नौसैनिक क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि नौसेना रणनीतिक रूप से मजबूत क्षेत्रीय शक्ति के तौर पर अहम भूमिका निभा रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में जहाजों की बढ़ती भीड़, धोखेबाजी और 'ग्रे-जोन' गतिविधियों ने स्थिति को पहले से अधिक जटिल बना दिया है। उन्होंने समुद्री निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और बढ़ते समुद्री यातायात के विश्लेषण की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना में रणनीतिक आधार है। नौसेना की भूमिका केवल समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और शक्ति प्रदर्शन को भी मजबूत करती है। नौसेना को सरकार के हर संभव समर्थन का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री शक्ति का उद्देश्य केवल समुद्र में तिरंगा लहराना नहीं, बल्कि जहां भी तिरंगा दिखे वहां सुरक्षा, भरोसे और विश्वास का संदेश देना है। उन्होंने कहा, "अगर समुद्र सुरक्षित हैं, तो भारत सुरक्षित होगा और अगर भारत सुरक्षित है, तो विकसित भारत का संकल्प और मजबूत होगा।"

रक्षा मंत्री ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, खासकर एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत अपने कच्चे तेल का करीब 85 से 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का करीब 50 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आयात करता है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और रक्षा तैयारियों से सीधे जुड़ी है। नौसेना के स्वदेशीकरण का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय युद्धपोत निर्माण तंत्र अब वैश्विक मानकों को पूरा कर रहा है। हाल में कमीशन किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत को अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ मित्र देशों को युद्धपोतों का निर्यात भी करना चाहिए। श्री सिंह ने मौजूदा वर्ष को नौसेना के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस वर्ष 18 युद्धपोतों को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा रहा है जो नौसेना के इतिहास में एक साल में सबसे बड़ी संख्या है। उन्होंने इसे देश के घरेलू नौसैनिक जहाज निर्माण तंत्र की बढ़ती क्षमता का संकेत बताया। उन्होंने 'ऑल रैंक्स, ऑल रोल्स' के तहत महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नौसेना के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों और विमानों पर महिला अधिकारियों की तैनाती तथा 'नाविका सागर परिक्रमा' में उनकी भागीदारी का भी उल्लेख किया। रक्षा मंत्री ने संयुक्त समुद्री बलों के तहत 'कंबाइंड टास्क फोर्स-154' की कमान संभालने पर नौसेना को बधाई दी।

उन्होंने कोच्चि में भारत की कमान के दौरान हुए 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस' का भी उल्लेख किया, जिसमें 27 देशों के 276 कर्मियों, 76 विशेषज्ञों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हिस्सा लिया। उन्होंने 'लोकायन-26' के लिए आईएनएस सुदर्शिनी की तैनाती को भी भारत की समुद्री कूटनीति और भारतीय प्रवासियों के साथ जुड़ाव के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। नौसेना के कमांडरों का तीन दिन का सम्मेलन एक अक्तूबर तक चलेगा । इसमें नौसेना का शीर्ष नेतृत्व अभियानों की तैयारी, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की क्षमता विकास की समीक्षा कर रहा है।

संजीव जितेन्द्र वार्ता

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टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
राजनाथ नौसेना सम्मेलन
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
29/09/26 11:35
पिछला अपडेट
29/09/26 11:35
स्थान
India