राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना पांच साल के लिए बढ़ायी गयी, दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम उम्र की सीमा समाप्त

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (वार्ता) सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' करने के साथ ही दिव्यांगजन पेंशन के लिए दिव्यांगता पात्रता की सीमा 80 से घटाकर विकलांगता 40 प्रतिशत तथा न्यूनतम उम्र की सीमा समाप्त कर दी है।
सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परिवर्तित नाम से प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस योजना पर कुल 53,428 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस फैसले से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' करने का निर्णय लिया है। इसी तरह, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम 'प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना', इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम 'प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना' और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना का नाम 'प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना' कर दिया गया है। राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को अब 'प्रधानमंत्री पारिवार लाभ योजना' के नाम से जाना जाएगा। इन बदलावों के माध्यम से केंद्र सरकार की सामाजिक सहायता योजनाओं को नए नामों के साथ जारी रखा जाएगा।
कैबिनेट के फैसले के तहत दिव्यांगजन पेंशन की सहायता राशि में भी बदलाव किया गया है। अब 0 से 79 वर्ष आयु वर्ग के पात्र दिव्यांगजनों को 375 रुपये और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, पेंशन के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा मौजूदा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। अब दिव्यांगजन पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त भी जन्म से लागू होगी। इन बदलावों का उद्देश्य अधिक दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना और पात्रता संबंधी शर्तों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप बनाना है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि में किए गए बदलावों को लागू करने के लिए तीन महीने के भीतर दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। वृद्धावस्था और विधवा पेंशन तथा परिवार लाभ योजना पहले की व्यवस्था के अनुसार चलती रहेंगी। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त, 1995 को गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से की गई थी। यह योजना संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अनुरूप सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की जिम्मेदारी से जुड़ी है। इसके तहत केंद्र सरकार शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता देती है, ताकि देशभर में पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
आजाद.श्रवण वार्ता

