विद्यार्थी परिषद विपक्ष की 'साजिशों’ के खिलाफ विद्यार्थियों के बीच चलाएगी राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान

नयी दिल्ली, 5 नवंबर (वार्ता) विभिन्न विश्वविद्यालयों के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र-यूनियन नेताओं ने संवैधनिक संस्थाओं के खिलाफ कांग्रेस और वाम दलों के आरोपों को इन संस्थाओं को बदनाम और कमजोर करने की ' साजिश' करार देते हुए गुरुवार को यहां घोषणा की कि वे इस षड्यंत्र के खिलाफ का देश भर में विद्यार्थियों के बीच जागरूकता अभियान चलाएंगे।
विद्यार्थी परिषद ने इसके लिए देशभर के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को अगले कुछ महीनों के दौरान 'छात्र गर्जना रैलियों' का आयोजन करने की योजना बनायी है। विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन इस इस योजना की घोषणा की। संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली, पंजाब, लद्दाख, उत्तराखंड, ओडिशा, असम एवं पूर्वोत्तर सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए थे। श्री सोलंकी ने ' यूनीवार्ता' से कहा , 'भारत की परिस्थितियों की तुलना बांग्लादेश और नेपाल के हालात से किसी भी तरह नहीं की जा सकती। विपक्षी दल ऐसा करके भोले भाले लोगों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।'
उन्होंने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, 'लोकतंत्र में चुनाव जीतना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण चुनावी जनादेश और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना भी है। राहुल गांधी और विपक्षी दल यदि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल उठाते हैं, तो उन्हें प्रमाणों के साथ संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए।'
श्री सोलंकी ने कहा, 'लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सबको है, लेकिन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बिना प्रमाण सवाल उठाना उचित नहीं है। विपक्षी नेताओं को राजनीतिक संघर्ष का रास्ता संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से ही निकलना चाहिए।' विद्यार्थी परिषद के दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, 'कुछ विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर बिना किसी तथ्य के आधारहीन आरोप लगाए और गैरजिम्मेदाराना तरीके से विरोध-प्रदर्शन किए। इसके विरोध में देशभर के करीब 15 हजार विद्यार्थियों ने 'अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ' के नारे के साथ कांग्रेस और वाम दलों की लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों का पुरजोर विरोध किया।'
इस अवसर पर देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों ने लोकतांत्रिक जनादेश के सम्मान, निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर अपना स्पष्ट पक्ष रखा।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के निर्णय, संस्थागत विश्वास और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति प्रतिबद्धता का नाम है। संगठन के निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास का वातावरण बनाना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
विद्यार्थी परिषद के उपस्थित छात्र यूनियन नेताओं में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष यश डबास, सचिव रिया छावड़ी, संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह, पूर्व डूसू सचिव अपराजिता एवं पूर्व डूसू संयुक्त सचिव शिवांगी खारवाल; पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष अंकित भिदान एवं पूर्व अध्यक्ष गौरववीर सोहल; लद्दाख विश्वविद्यालय के निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि; डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष नवदीप राणा; उत्कल विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अभिराम; गुवाहाटी विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष मानस प्रतिम कलिता तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व संयुक्त सचिव वैभव मीणा सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारी शामिल थे।
मनोज मनोहर वार्ता

