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वोटर के हित में हमारा विरोध तथा प्रतिरोध कम नहीं होगा, 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हों बहाल : कांग्रेस

वोटर के हित में हमारा विरोध तथा प्रतिरोध कम नहीं होगा, 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हों बहाल : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (वार्ता) कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में गड़बड़ी संबंधी खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को निलंबित करने और मतदाता सूचियों से हटाये गये 13 करोड़ 30 लाख नामों को तत्काल बहाल करने की मांग की है।

पार्टी ने कहा है कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की कठपुतली बनकर काम रहा है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता की लालसा में करोड़ों लोगों को एसआईआर के नाम पर मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में श्री मोदी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह करोड़ों लोगों को वोट के अधिकार से वंचित होने से बचायें।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल तथा संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर विरोध और प्रतिरोध दोनों कर रही है और शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक रूप से इसका विरोध जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि चुनाव में 'मैच फिक्सिंग' हो रही है और यह मुद्दा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दो साल पहले उठा दिया था, तब किसी को इस पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन आज वही सच साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतंत्र को खत्म करने के लिए यह कदम उठा रही है।

देश में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया है इसलिए श्री मोदी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह करोड़ों लोगों को वोट के अधिकार से वंचित होने से बचायें। कांग्रेस कार्य समिति ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि हालिया रिपोर्टों से यह साफ होता है कि भारत में मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में चुनाव आयोग की मिलीभगत से आरएसएस-भाजपा ने संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया है।

इन खुलासों से श्री गांधी द्वारा लगातार व्यक्त की जा रही आशंकाओं की पुष्टि होती है। सीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव में कहा गया है कि राहुल गांधी ने लगातार आदर्श आचार संहिता के चयनात्मक और पक्षपातपूर्ण ढंग से लागू किए जाने, ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों, मतदाता सूचियों में मनमाने ढंग से नाम जोड़ने और हटाने, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की बदली हुई प्रक्रिया तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को आजीवन कानूनी संरक्षण दिए जाने जैसे मुद्दों को उठाया है।

इसके साथ ही कार्य समिति ने कहा है कि दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों में 14 आपत्तियां दर्ज कीं और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में प्रयुक्त फॉर्म-6 में किये गये बदलावों को 'अनधिकृत' और 'अवैध' बताया। प्रस्ताव में कहा गया कि दोनों आपत्तियां संस्थागत अधिकारों के अतिक्रमण के एक पैटर्न को उजागर करती हैं। कार्य समिति ने एसआईआर की संवैधानिक वैधता को लेकर भी गंभीर चिंता जतायी और कहा कि अब तक 13 करोड़ 30 लाख भारतीयों के नाम मतदाता सूचियों से हटाये गये हैं।

नागरिकों पर अपनी पात्रता स्वयं साबित करने का भार डालना और ऐसी प्रक्रिया को बिना पारदर्शी सुरक्षा उपायों के जल्दबाजी में लागू करना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 के तहत निहित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि समिति ने यह भी कहा है कि पार्टी इस लड़ाई को जनता के बीच और हर उपलब्ध मंच पर ले जा चुकी है।

बिहार में वोटर अधिकार यात्रा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदाता सूचियों में हेरफेर को उजागर करने वाली प्रेस कांफ्रेंसें, देशव्यापी 'वोट चोरी' अभियान, चुनाव आयोग के साथ संवाद, प्रक्रियात्मक बदलावों के विरुद्ध लिखित आपत्तियां, एसआईआर को कानूनी चुनौती, संसद में इंडिया गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन तथा चुनाव आयोग तक मार्च का उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि कांग्रेस संसद में, अदालतों में और सड़कों पर तब तक इसका विरोध करेगी, जब तक दोषियों को दंडित नहीं किया जाता, प्रत्येक नागरिक का वोट सुरक्षित नहीं हो जाता और चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में पुनर्स्थापित नहीं किया जाता। अभिनव अशोक वार्ता

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
667
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
कांग्रेस मोदी एसआईआर
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
,
प्रकाशित तिथि
29/09/26 09:59
पिछला अपडेट
29/09/26 09:59
स्थान
India