नयी दिल्ली 25 सितम्बर (वार्ता) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने युवाओं से सवाल पूछने, गंभीरता से सोचने और समाज तथा देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करने का आह्वान करते हुए कहा है कि सवाल पूछना लोकतंत्र का जरूरी आधार है, लेकिन सवाल व्यवस्था को बाधित करने के लिए नहीं, उसे बेहतर बनाने के लिए पूछे जाने चाहिए।
श्री राधाकृष्णन ने शुक्रवार को यहां श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में तीसरे अरुण जेटली स्मृति वाद-विवाद प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों से स्वतंत्र सोच के साथ फैसले लेने को कहा। उन्होंने कहा कि किसी का समर्थन करने से पहले यह देखना चाहिए कि उससे समाज और देश को लाभ होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र असहमति से कमजोर नहीं होता, बल्कि तर्क, प्रमाण और संवाद के जरिए असहमति पर विचार करने से मजबूत होता है।
उन्होंने सोशल मीडिया, एल्गोरिदम और तुरंत प्रतिक्रिया वाले मौजूदा दौर में जिम्मेदार और तर्कपूर्ण सार्वजनिक संवाद के महत्व पर भी जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने छात्रों से लगातार सीखते और स्थिति के अनुरूप ढलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चुनौतियां पैदा कर रही है, लेकिन इन्हें अवसरों में बदला जा सकता है। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि एल्गोरिदम को कभी भी इंसानी बुद्धि का विकल्प नहीं बनने देना चाहिए और मानव रचनात्मकता की जगह एआई नहीं ले सकता।
एसआरसीसी के 100 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने कहा कि संस्थान तब महान बनते हैं, जब हर पीढ़ी उन्हें पहले से बेहतर बनाकर आगे बढ़ाती है। उपराष्ट्रपति ने तीसरे अरुण जेटली स्मृति वाद-विवाद के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये और सभी प्रतिभागियों को समकालीन मुद्दों पर विचारपूर्ण तर्क और सक्रिय भागीदारी के लिए बधाई दी।
संजीव अशोक वार्ता