एक्सक्लूसिव ख़बरें और डेटा, जो मार्केट प्रोफेशनल्स को रखते हैं सबसे आगे। Sunday, October 11, 2026

सीजेपी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सुरक्षा की तुलना खुले आपातकाल से की

सीजेपी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सुरक्षा की तुलना खुले आपातकाल से की

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (वार्ता) कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने रविवार को प्राधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने वाले पार्टी के अभियान को दबाने के लिए सुरक्षा प्रतिबंधों एवं सार्वजनिक परिवहन में बाधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी की स्थिति की तुलना खुले आपातकाल से की। एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, सीजेपी कार्यकर्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि दिल्ली में सुरक्षा कर्मियों की भारी तैनाती और लगाई गई पाबंदियों का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों का हौसला तोड़ना और आम नागरिकों को परेशानी में डालना है। 1975 में लगे आपातकाल से तुलना करते हुए सौरभ ने दावा किया कि राजधानी को भारी सुरक्षा वाले इलाके में बदल दिया गया है और शहर में लगभग 30,000 से 40,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तैनाती में कश्मीर, पश्चिम बंगाल और नक्सल-प्रभावित इलाकों से लाए गए सैनिक और कर्मचारी शामिल हैं। उनके अनुसार, सुरक्षा इंतज़ामों का दायरा सिर्फ़ प्रदर्शन को संभालने तक ही सीमित नहीं था बल्कि इसने उन लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर भी असर डाला, जिनका इस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था। सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर लगी पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए सौरभ ने आरोप लगाया कि अधिकारी बड़े पैमाने पर असुविधा पैदा करके सीजेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन के खिलाफ़ लोगों की राय बनाने की कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने कहा, "रविवार को 57 मेट्रो स्टेशन बंद करना, राजधानी समेत ट्रेनों की सेवा रोकना और बाज़ारों को जबरन बंद करवाना रोज़मर्रा की ज़िंदगी को परेशानी में डालता है। प्रशासन जान-बूझकर जनता को परेशान कर रहा है ताकि युवाओं के नेतृत्व वाले इस आंदोलन के ख़िलाफ़ लोगों की राय बनाई जा सके।"

इस बीच, आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की कि शनिवार को हिरासत में रहने के दौरान सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके को उनकी दादी की मौत की जानकारी किस तरह दी गई। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले के संटुक पिंपरी गांव में लंबे समय तक बीमार रहने के बाद अभिजीत दिपके की दादी का निधन हो गया।आशुतोष रांका ने कहा, "कल अभिजीत की दादी का निधन हो गया और यह खबर देने के दौरान दिल्ली पुलिस का बर्ताव बेहद अमानवीय था। देश की राजधानी में पुलिस बल का ऐसा असंवेदनशील व्यवहार शर्मनाक है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि खबर देते समय पुलिसकर्मियों ने दीपके के आस-पास कैमरे और माइक्रोफ़ोन लगा दिए, जिससे दुख की एक निजी घड़ी तमाशा बन गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने संवेदनहीनता के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि अभिजीत दिपके को मौत की खबर पूरी संवेदनशीलता के साथ दी गई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें अंतिम संस्कार के समय के बारे में जानकारी दी गई और मानवीय आधार पर उनके गांव जाने के लिए मदद की पेशकश भी की गई। यह संवाददाता सम्मेलन शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई तनावपूर्ण तनातनी के बाद आयोजित किया गया। सीजेपी और कई छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर श्री कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को दिल्ली में एक फ़्लाइट से उतरते समय हिरासत में ले लिया, क्योंकि उनके पास तय प्रदर्शन के लिए ज़रूरी मंज़ूरी नहीं थी। गाज़ीपुर बॉर्डर पर बैरिकेड भी लगाए गए, जबकि मेट्रो सेवाओं पर लगी पाबंदियों की वजह से विपक्षी पार्टियों और प्रदर्शन के आयोजकों ने आलोचना की। राष्ट्रीय राजधानी में अलग-अलग जगहों पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और माकपा नेता पिनाराई विजयन समेत करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई से राजनीतिक टकराव शुरू हो गया; विपक्षी नेताओं ने अधिकारियों पर तानाशाही का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्ष अराजकता को बढ़ावा दे रहा है। बाद में पुलिस सूत्रों ने बताया कि डिटेंशन सेंटर में रखे गए सभी लोगों को रिहा कर दिया गया है, सिवाय सीजेपी नेताओं के, जिनके मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

सीजेपी, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन और स्टूडेंट्स' फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आगे और प्रदर्शनों की घोषणा किए जाने की संभावना के बीच पुलिस की तैनाती जारी रहने की उम्मीद है। जहां सीजेपी का आरोप है कि इन पाबंदियों का मकसद असहमति को दबाना और उनके आंदोलन को कमज़ोर करना है, वहीं पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ज़रूरत का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई का बचाव किया है।

अभय, मधुकांत वार्ता

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
756
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
सीजेपी दिल्ली सुरक्षा आपातकाल
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
,
प्रकाशित तिथि
11/10/26 14:44
पिछला अपडेट
11/10/26 14:44
स्थान
India