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बिहार एम्स ग्लूकोमा जागरूकता दो अंतिम पटना

डॉ. भावेश चंद्र साहा ने बताया कि ग्लूकोमा होने का अधिक जोखिम उन लोगों में होता है जो 40 वर्ष से अधिक आयु के हैं, मधुमेह से पीड़ित हैं, जिनमें उच्च मायोपिया (ज्यादा नंबर का चश्मा) है, जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास है, जिनकी आंखों में पहले चोट लगी हो, तथा जो लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के या लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन उच्च जोखिम वाले लोगों को बीमारी की समय पर पहचान और उचित उपचार के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी चाहिये। श्री साहा ने बताया…

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टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बिहार एम्स ग्लूकोमा जागरूकता दो अंतिम पटना
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
10/03/26 00:00
पिछला अपडेट
10/03/26 00:00
स्थान
India