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बिहार कफ़न मंचन दो अंतिम पटना

अपने संबोधन में मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि भारतीय समाज के सजग चिंतक और युगद्रष्टा थे। उनके उपन्यासों और कहानियों में समाज की वास्तविकता, संघर्ष, मानवीय संवेदनाएँ तथा सामाजिक सरोकारों का जीवंत चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से अवश्य जुड़ना चाहिए, क्योंकि उनकी रचनाएँ जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की सीख देती हैं। उन्होंने प्रेमचंद की विभिन्न रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने समय में था।…

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टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बिहार कफ़न मंचन दो अंतिम पटना
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
31/07/26 16:31
पिछला अपडेट
31/07/26 16:31
स्थान
India