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बिहार झिझिया सांस्कृतिक स्मृति तीन अंतिम मोतिहारी
प्रकाशित तिथि: 15/10/26 13:24
India
झिझिया को केवल तंत्र-मंत्र, बुरी नजर या अनिष्ट से बचाव की मान्यताओं तक सीमित कर देना इसके व्यापक सांस्कृतिक अर्थ को संकुचित करना होगा। इसके भीतर लोकगीतों की मौखिक परंपरा, मिट्टी के शिल्प का उपयोग, स्त्रियों की सामूहिक कलात्मक अभिव्यक्ति और ग्रामीण समाज की सहभागिता जैसे अनेक पक्ष समाहित हैं। यही विशेषताएं इसे चंपारण और उत्तर बिहार की लोकधर्मी विरासत का महत्वपूर्ण अंग बनाती हैं।हालांकि, परंपरा के मौखिक स्वरूप के कारण गीतों, धुनों, स्थानीय शब्दों और अनुष्ठान की विविध शैलियों के लुप्त होने का खतरा बना रहता है। अलग-अलग गांवों में प्रचलित गीतों और विधियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, बुजुर्ग लोकगायिकाओं…