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मिट्टी के घड़े में लोकविश्वास की लौ, चंपारण की सांस्कृतिक स्मृति में आज भी जीवंत है झिझिया

( संजय कौशिक)मोतिहारी, 15 अक्टूबर (वार्ता)मिट्टी के छिद्रदार घड़े में टिमटिमाता दीपक, ढोलक की थाप पर थिरकते कदम और लोकगीतों में गूंजती देवी आराधना। शारदीय नवरात्र की रातों में चंपारण के ग्रामीण अंचल में झिझिया की यह छवि केवल एक लोकनृत्य का दृश्य नहीं, बल्कि लोकविश्वास, स्त्री-सृजनशीलता और सामुदायिक जीवन की सदियों पुरानी सांस्कृतिक स्मृति है। आधुनिकता और डिजिटल दौर में भी गांवों की गलियों में जीवित यह परंपरा बताती है कि लोकसंस्कृति का प्रकाश साधारण मिट्टी के पात्र में भी पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकता है। झिझिया बिहार के उत्तरवर्ती भोजपुरी और मिथिला सांस्कृतिक क्षेत्रों के साथ नेपाल के…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बिहार झिझिया सांस्कृतिक स्मृति
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
15/10/26 13:20
पिछला अपडेट
15/10/26 13:20
स्थान
India