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कार्यशाला में भागलपुर की प्रसिद्ध लोकचित्र शैली मंजूषा कला की पारंपरिक विरासत को सहेजने पर भी विशेष जोर दिया गया। अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा और बिहुला-विषहरी की लोकगाथा से जुड़ी इस कला में झाँपी का विशेष महत्व रहा है। हालांकि, समय के साथ झाँपी पर मंजूषा चित्रांकन की परंपरा कमजोर पड़ती गई है। इसे पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ मंजूषा कलाकार एवं प्रशिक्षक पवन सागर के नेतृत्व में माली कलाकारों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें 20 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया और झाँपी पर मंजूषा चित्रांकन की तकनीक, पारंपरिक आकृतियों तथा रंगों के संयोजन…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बिहार मंजूषा कला नवाचार दो अंतिम भागलपुर
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
29/10/26 14:14
पिछला अपडेट
29/10/26 14:14
स्थान
India