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गृहस्थ जीवन में रहते हुए ईश्वर-साक्षात्कार की राह दिखाने वाले योगावतार थे लाहिड़ी महाशय

रांची, 24 सितंबर (वार्ता) योग और अध्यात्म की दुनिया में लाहिड़ी महाशय का जीवन इस बात का अनुपम उदाहरण है कि गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी मनुष्य ईश्वर-साक्षात्कार और आत्मिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। लाहिड़ी महाशय ने क्रिया योग के माध्यम से साधना की ऐसी सरल राह दिखाई, जो सांसारिक जीवन से दूर जाने के बजाय उसके बीच रहकर आत्मिक विकास का संदेश देती है। 30 सितंबर 1828 को बंगाल के घुर्णी गांव में जन्मे लाहिड़ी महाशय ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय रानीखेत के निकट हिमालय की तलहटी में सरकारी…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
बिहार लाहिड़ी योगावतार
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
24/09/26 09:25
पिछला अपडेट
24/09/26 09:25
स्थान
India