एनएसई का आईपीओ देश के पूंजी बाजार के लिए जश्न का मौका

जयंत रॉय चौधरी
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई) का शेयर लंबी प्रतीक्षा के बाद गुरुवार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुआ और बाजार खुलने के कुछ ही देर बाद इसके शेयर की कीमत उछलकर 1,850 रुपये पर पहुंच गई।
इसके साथ ही, शेयर मूल्य के हिसाब से इस एक्सचेंज की बाजार हैसियत 4,56,000 करोड़ से अधिक हो गई, और यह सूचीबद्ध शेयर बाजारों में दुनिया में शीर्ष 10 में पहुंच गया। एनएसई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आशीष कुमार चौहान अब एकमात्र ऐसे बाजार प्रशासक बन गए हैं जिन्हें देश के दो प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंजों - एनएसई और बीएसई - के शेयरों को सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध कराने का श्रेय मिला है। एनएसई का शेयर आज बीएसई में सूचीबद्ध हुआ जबकि बीएसई का शेयर पहले से एनएसई में सूचीबद्ध है। इस अवसर पर मुंबई में बीएसई में आयोजित लिस्टिंग समारोह में श्री चौहान ने कहा, "जो भारत के लिए अच्छा है, वह एनएसई के लिए भी अच्छा है।"
वह नौ साल पहले बीएसई के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने समय उसके सीईओ के पद पर थे। एनएसई के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को देश में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है। इससे पहले साल 2024 में हुंडई मोटर्स का आईपीओ लगभग 30,000 करोड़ रुपये का था। एनएसई का आईपीओ 22,562 करोड़ रुपये का रहा। करीब एक दशक की विनियामकीय बाधाओं, कानूनी पेचीदगियों और बदलती बाजार परिस्थितियों के बाद वह शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई है। एनएसई का भारतीय शेयर बाजार में दबदबा है। नकदी वाले शेयर बाजार का लगभग 93 प्रतिशत और ऑप्शंस ट्रेडिंग का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा इसी एक्सचेंज पर होता है। इस एक्सचेंज का आर्थिक मॉडल निवेशकों को देश के पूंजी बाजार के विस्तार और विनियमन से सीधे जुड़ने का एक अनोखा मौका देता है।
एनएसई के सूचीबद्ध होने पर कई विशेषज्ञों ने 'यूनीवार्ता' से बातचीत में कहा कि वित्तीय ढांचे को सफलतापूर्वक बाजार में चढ़ाने में श्री चौहान की ख्याति है। एनएसई और बीएसई के सफल आईपीओ का नेतृत्व करने के अलावा, उन्हें एनएसडीएल, प्रोटिअन ईगोव टेक और सीडीएसएल के आईपीओ का नेतृत्व करने का श्रेय भी जाता है। दिल्ली के कारोबारी विक्रम साहनी ने कहा, "पांच बड़ी सफलताओं के साथ, अब उन्हें एक 'सुपर-अचीवर' के तौर पर देखा जाता है।"
श्री चौहान का करियर देश के आधुनिक पूंजी बाजार की कई अहम संस्थाओं से जुड़ा रहा है। आईआईएम कलकत्ता के पूर्व छात्र रहे चौहान एनएसई के शुरुआती दौर का हिस्सा थे, बाद में बीएसई के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बने। फिर एनएसई में सीईओ के तौर पर लौटे। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीएसई, एनएसई और आईडीबीआई बैंक में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। भारतीय पूंजी बाजार में उनकी ख्याति ऐसे व्यक्ति की है जो मिट्टी को छू दे तो वह सोना बन जाती है। एनएसई का आईपीओ ऐसे समय में आया है जब बाजार विनियामक देश के डेरिवेटिव्स बाजार की तेजी में सट्टेबाजी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। डेरिवेटिव्स, खासकर ऑप्शंस, एनएसई की कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया बन गए हैं। हालांकि नियामकीय बदलावों और कारोबार में कमी ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यह विकास कितना टिकाऊ हो सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय शेयरों के वायदा कारोबार में एनएसई की हिस्सेदारी 99.79 प्रतिशत थी।
इस खंड में कुल 394.67 लाख करोड़ रुपये में से 393.82 लाख करोड़ रुपये का कारोबार एनएसई पर हुआ। शायद यही वजह है कि सूचीबद्धता में बड़ी सफलता के बावजूद यह आईपीओ 30,000 करोड़ रुपये के आंकड़े से आगे नहीं बढ़ पाया। एनएसई का निर्गम मूल्य 1,785 रुपये प्रति शेयर था। इस आधार पर इसका मूल्यांकन कंपनी के 2025-26 के लाभ का लगभग 43 गुना है। इसकी प्रतिद्वंद्वी बीएसई, जो 2017 से ही सूचीबद्ध है, अपने प्रति शेयर लाभ से लगभग 47 गुना पर चल रहा है, हालांकि बीएसई का कुल बाजार मूल्यांकन एनएसई का लगभग एक-तिहाई है।
बाजार के जानकारों का कहना है, "असल में इस समय इस एक्सचेंज से एक साथ दो चीजों का मूल्यांकन करने के लिए कहा जा रहा है। पहली चीज, देश के एक्सचेजों के वित्तीयकरण से होने वाला जबरदस्त मुनाफा और दूसरी, इस बात की संभावना कि बाजार विनियामक इस एक्सचेंज के सबसे अधिक लाभ देने वाले इंजन (डेरिवेटिव कारोबार) पर शिकंजा कस सकता है।"
मनोहर अजीत वार्ता

