तकनीक आधारित पेंशन सेवाओं से दक्षता बढ़ी : जितेंद्र सिंह
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नयी दिल्ली, 17 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि तकनीक आधारित पेंशन सेवा वितरण से व्यवस्था में अधिक दक्षता आई है और जनशक्ति तथा वित्तीय संसाधनों की उल्लेखनीय बचत हुई है।
डॉ. सिंह सोमवार को यहां आयोजित नौवें राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार समारोह-2026 और 60वें सेवानिवृत्ति-पूर्व परामर्श कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सेवानिवृत्त और सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा हैं और उनके अनुभव का उपयोग प्रशासनिक सुधारों के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप वर्ष 2015 में शुरू की गई अनुभव पहल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के वर्षों के अनुभव को संरक्षित करना और उसका उपयोग शासन व्यवस्था में सुधार के लिए करना है। उन्होंने कहा कि इसका महत्व केवल पुरस्कार पाने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अनुभव सरकार को नीतियों, प्रक्रियाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों की पहचान करने में व्यावहारिक मदद देते हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार बदलती प्रशासनिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप पेंशन प्रक्रियाओं को लगातार सरल बना रही है। पेंशन फॉर्म से अनावश्यक प्रावधान हटाए गए हैं और जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। परिवार पेंशन के प्रावधानों को भी समकालीन सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत किया गया है, जिसमें पात्र बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पेंशन व्यवस्था में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए और इसमें कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों के अनुभव, सुझाव और बदलती सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने पेंशनभोगियों और सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों से अपने सुझाव लगातार साझा करने का आह्वान किया।
उन्होंने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और फेस ऑथेंटिकेशन पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीक ने पेंशनभोगियों के लिए पहले आवश्यक भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान अब व्यापक जनभागीदारी का रूप ले चुका है, जिसमें बैंक, सरकारी विभाग, पेंशनभोगी संगठन और परिवार के सदस्य बुजुर्गों को प्रमाणपत्र जमा करने में सहयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पेंशन सेवाओं में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से पेंशनभोगियों की सुविधा बढ़ने के साथ-साथ प्रशासनिक बोझ भी कम हुआ है। पेंशन अदालतों के माध्यम से मौके पर शिकायतों के समाधान और समस्याओं को जड़ स्तर पर दूर करने के प्रयासों से मुकदमों की संख्या कम करने में भी मदद मिल रही है।
डॉ. सिंह ने सभी राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार और ज्यूरी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि दशकों तक देश की सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों का अनुभव एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा है। उन्होंने कहा कि पेंशन सुधार केवल सेवानिवृत्ति लाभ के भुगतान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मान और सुविधा प्रदान करना तथा राष्ट्र निर्माण में उनके अनुभव और विशेषज्ञता के निरंतर उपयोग के अवसर पैदा करना भी है।
आजाद उप्रेती
वार्ता

