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केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा, लैंगिक समानता के चश्मे से नहीं देखी जा सकतीं ज़रूरी धार्मिक प्रथाएं

नयी दिल्ली, 07 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय में सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े 2018 के फैसले की समीक्षा याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सभी संवैधानिक प्रश्नों को केवल लैंगिक समानता के दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता और 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का बचाव किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ में न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना, एम. एम. सुंद्रेश, अहसानुद्दीन…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला सुनवाई
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
07/04/26 00:00
पिछला अपडेट
07/04/26 00:00
स्थान
India