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जगरगुंडा ने तोड़ा डर का घेरा , जहां शाम ढलते ही थम जाती थीं सांसें

सुकमा, 23 अप्रैल (वार्ता) छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के जगरगुंडा में कभी ऐसा समय था जब शाम का मतलब सिर्फ अंधेरा नहीं, बल्कि खामोशी और डर भी होता था। सूरज ढलते ही गांव जैसे खुद को समेट लेता था कंटीले तारों से घिरी बस्तियां, भारी गेट और भीतर कैद जिंदगी। छह बजते ही दरवाजे बंद, रास्ते सूने और हर घर के भीतर एक अनकहा खौफ। लेकिन अब वही जगरगुंडा धीरे-धीरे उस दौर से बाहर निकलकर एक नई कहानी लिख रहा है जहां रात अब सन्नाटे की नहीं, हलचल की पहचान बन रही है। बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा की सीमाओं के…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
छत्तीसगढ़ जगरगुंडा डर
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
23/04/26 00:00
पिछला अपडेट
23/04/26 00:00
स्थान
India