धर्मस्थलों के बाकी विवादों को अदालतों के फैसले पर छोड़ दिया जाए, आरक्षण व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत: संघ

इंदौर/ भोपाल 04 नवंबर (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को यहां कहा कि राम मंदिर के बाद अब बाकी धर्मस्थलों के अदालतों में चल रहे मामलों को उनके फैसलों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था तब तक बनी रहनी चाहिए, जब तक समाज में पिछड़ापन बना हुआ है।
श्री होसबोले संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की यहां तीन दिवसीय बैठक के समापन के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान आरक्षण, कृष्ण जन्मभूमि विवाद, संघ के पंजीयन, संगठन विस्तार, युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और सेवा कार्यों सहित विभिन्न विषयों पर सवालों के जवाब दिये और संघ का पक्ष रखा। संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की यहां डेली कॉलेज में दो से चार नवंबर की इस बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि सहित विभिन्न धर्मस्थलों पर विवाद को लेकर अदालतों में विचाराधीन मामलों को लेकर पूछे गए एक सवाल पर श्री होसबाले ने कहा, " हमें राम मंदिर बनाकर दिखाना था, वह हमने बना दिया। बाकी मामले अदालतों में चल रहे हैं, उन्हें वहीं रहने देना चाहिए।" आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि समाज में जो वर्ग पिछड़े हुए हैं, उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। उनके अनुसार, जब तक समाज में पिछड़ापन है, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। संघ के सांगठनिक कार्यों के बारे में सरकार्यवाह ने बताया कि संगठन के शताब्दी वर्ष के दौरान एक साल में संघ की पहुंच 10,241 नये स्थानों तक बढ़ी है। वर्तमान में देश के 63,208 स्थानों पर 99,423 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इसके अतिरिक्त 34,982 साप्ताहिक मिलन और 14,096 मासिक मंडलियां भी चल रही हैं। इन सभी गतिविधियों के माध्यम से संघ की पहुंच कुल 1,03,397 स्थानों तक हो गई है।
श्री होसबोले ने बताया कि पश्चिम बंगाल में संघ की शाखाओं की संख्या पहले की तुलना में डेढ़ सौ गुना बढ़ी है। पहले वहां शाखाएं लगाने में विरोध का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के कारण ऐसी परेशानी नहीं होती। कम आबादी और हिंदुओं की कम संख्या वाले क्षेत्रों में भी शाखाएं शुरू की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि सामाजिक एकता और समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शताब्दी वर्ष में देशभर में 94,218 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें संघ के अनुसार करीब पांच करोड़ लोगों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि संघ समाज के सभी वर्गों के बारे में विचार करता है और महिलाओं तथा युवाओं को भी संगठन की गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए श्री होसबाले ने कहा कि युवाओं को ड्रग्स और अन्य नशे से बचाने के लिए संघ विशेष योजना तैयार करेगा। जो युवा पहले से नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनकी काउंसलिंग भी की जाएगी। बैठक में इस दिशा में काम करने पर चर्चा हुई है। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों और कार्यक्रमों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही युवाओं में बदलते रुझान और जेन-जी की सोच जैसे विषयों पर भी बैठक में विचार-विमर्श हुआ। संघ के पंजीयन को लेकर पूछे गए सवाल पर श्री होसबाले ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज का अंग है। ऐसे कई संगठन हैं, जिनका पंजीयन नहीं है। संघ समाज के कल्याण और देश के कानून के अनुसार काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि नवंबर-दिसंबर में संघ के विभिन्न प्रांतों में संघ चालकों का निर्वाचन और नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। इसके बाद देशभर के 88 संभागों में संगठन के कार्यों की योजना तैयार की जाएगी। संघ के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने काम किया। उनके अनुसार, स्वयंसेवकों ने करीब 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाईं। बाढ़ से 805 गांव प्रभावित हुए थे और 1,500 से अधिक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। करीब 150 परिवारों को मकानों के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
उन्होंने बताया कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात से मकानों, फसलों और पशुधन को नुकसान पहुंचा था। कई स्थानों पर नारियल के हजारों पेड़ उखड़ गए और चार से पांच दिन तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। ऐसे क्षेत्रों में स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों के साथ मछुआरों और किसानों की भी मदद की। बैठक में समाजसेवी महापुरुषों के कार्यों को आगे बढ़ाने, शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती की भूमिका और विदेशों में संघ के काम का विस्तार करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा शताब्दी वर्ष के दौरान विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक संगठन की पहुंच बढ़ाने और आगामी गतिविधियों के क्रियान्वयन पर विचार किया गया।
दिनेश.मनोहर.श्रवण वार्ता

