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बिना वैध जाति प्रमाणपत्र के एससी/एसटी अधिनियम में सजा नहीं-उच्च न्यायालय

बिलासपुर, 23 अप्रैल (वार्ता) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(आर) के तहत किसी को दोषी ठहराने के लिए पीड़ित की जाति का ठोस और वैध प्रमाण होना जरूरी है। सिर्फ आरोप या सामान्य दावा पर्याप्त नहीं माना जाएगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने सुनवाई के दौरान की। मामला सरकारी जमीन पर दुकान बनाने को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस दौरान आरोपियों ने उसे जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया, मारपीट की और जान से मारने की…

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100
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
न्यायालय वैध जाति प्रमाण पत्र
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
23/04/26 00:00
पिछला अपडेट
23/04/26 00:00
स्थान
India