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22 अगस्त को दो बार उठी सतपुड़ा की आजादी की आवाज, बैतूल के आदिवासियों ने अंग्रेजी हुकूमत को दी थी खुली चुनौती

बैतूल, 22 अगस्त (वार्ता) देश की आजादी की लड़ाई का इतिहास महानगरों और बड़े राजनीतिक केंद्रों तक सीमित नहीं था। मध्यप्रदेश के सतपुड़ा अंचल में बसे आदिवासी समाज ने भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपने जंगल, जमीन, परंपरागत अधिकारों और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। बैतूल जिले के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में 22 अगस्त की तारीख इसी आदिवासी प्रतिरोध की दो महत्वपूर्ण घटनाओं की गवाह है। 22 अगस्त 1930 को बंजारीढाल में गंजन सिंह कोरकू के नेतृत्व में करीब 500 आदिवासी महिला-पुरुषों ने अंग्रेजी शासन के जंगल कानून को चुनौती दी थी। इसके 12 वर्ष बाद 22…

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टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
मप्र बैतूल स्वतंत्रता योगदान
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
22/08/26 10:25
पिछला अपडेट
22/08/26 10:25
स्थान
India