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मिक्सी की रफ्तार में पिछड़ रही सिलबट्टे की परंपरा, दो दिन की मेहनत पर मिलते हैं केवल 200 रुपये

बैतूल, 6 जुलाई (वार्ता) आधुनिक रसोई में मिक्सी और फूड प्रोसेसर के बढ़ते उपयोग के बीच पारंपरिक सिलबट्टा बनाने वाले कारीगरों के सामने आजीविका का संकट गहराता जा रहा है। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के खेड़ी सावलीगढ़ गांव में आज भी 15 से 20 परिवार इस पुश्तैनी शिल्प को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन घटती मांग और बढ़ती लागत के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। गांव के कारीगर सुबह से शाम तक छेनी और हथौड़ी की मदद से पत्थरों को तराशकर सिलबट्टा, चकला, लोढ़ी और खलबत्ता तैयार करते हैं। घंटों की मेहनत से…

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मिक्सी की रफ्तार में पिछड़ रही सिलबट्टे की परंपरा दो दिन की मेहनत पर मिलते हैं केवल 200 रुपये
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
06/07/26 07:51
पिछला अपडेट
06/07/26 07:51
स्थान
India