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मनोरंजन-आनंद बख्शी गायक दो अंतिम मुंबई

.... अपने वजूद को तलाशते आनंद बख्शी को लगभग सात वर्ष तक फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष करना पड़ा। वर्ष 1965 में 'जब जब फूल खिले' प्रदर्शित हुयी तो उन्हें उनके गाने 'परदेसियों से न अंखियां मिलाना', 'ये समां, समां है ये प्यार का', 'एक था गुल और एक थी बुलबुल' सुपरहिट रहे और गीतकार के रूप में उनकी पहचान बन गई। इसी वर्ष फिल्म 'हिमालय की गोद' में उनके गीत 'चांद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सोंचा था' को भी लोगो ने काफी पसंद किया। वर्ष 1967 में प्रदर्शित सुनील दत्त और नूतन अभिनीत फिल्म 'मिलन' के गाने…

समाचार विवरण:

कुल शब्द:
102
टाइप:
टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
मनोरंजन आनंद बख्शी गायक दो अंतिम मुंबई
स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
30/03/26 00:00
पिछला अपडेट
30/03/26 00:00
स्थान
India