बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एमएमआरडीए को मेट्रो निर्माण से जुड़ी सात दुर्घटनाओं के बारे में रिपोर्ट पेश करने का दिया निर्देश

मुंबई, 22 अक्टूबर (वार्ता) बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई महानगर क्षेत्र में गत 14 फरवरी से 17 अक्टूबर के बीच मेट्रो की तीन निर्माण परियोजनाओं में हुए सात हादसों पर मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है।
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने अधिवक्ता रुजू ठक्कर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। यह याचिका मुलुंड में फरवरी में हुए एक हादसे के बाद दायर की गई थी। इसमें मुंबई के मेट्रो गलियारों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की गयी है। सुनवाई के दौरान श्री ठक्कर ने अदालत को बताया कि मेट्रो लाइन-2बी, लाइन-4 और लाइन-9 से जुड़ी निर्माण स्थलों पर सात हादसे हो चुके हैं।
उन्होंने विशेष रूप से 17 अक्टूबर को आनंद नगर-साकेत एलिवेटेड कॉरिडोर के पास, ठाणे-मुंबई प्रवेश बिंदु के नजदीक हुए हादसे का उल्लेख किया। इस घटना में लोहे का एक सरिया ढांचा कथित तौर पर चलती कार पर गिर गया था, जिससे कार में सवार एक महिला यात्री और चालक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे में वाहन को भी काफी नुकसान पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि बार-बार हो रहे हादसों से निर्माण स्थलों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं और इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
एमएमआरडीए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने अदालत को बताया कि प्राधिकरण इस मामले को प्रतिकूल रूप से नहीं ले रहा है और याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई घटनाओं के संबंध में अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करेगा। खंडपीठ ने एमएमआरडीए को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की। यह मुकदमा 14 फरवरी को मुलुंड में एलबीएस रोड पर हुए हादसे से शुरू हुआ था।
यह हादसा वडाला-ठाणे-कासारवडावली मेट्रो लाइन-4 गलियारे के निर्माण के दौरान हुआ था। मेट्रो के एक खंभे से करीब 2.5 मीट्रिक टन वजनी कंक्रीट का पैरापेट नीचे गिर गया था। इसके बाद एमएमआरडीए की ओर से गठित जांच समिति ने हादसे के लिए ठेकेदार आरएजेवी की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में डिजाइन या निर्माण सामग्री में किसी तरह की खामी की आशंका को खारिज कर दिया था। समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि पैरापेट को सहारा देने वाले अस्थायी सपोर्ट हटा दिए जाने के कारण यह ढांचा गिरा था।
संतोष जितेन्द्र वार्ता

