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बिजनेस


बढ़ती लागत के बीच सकारात्मक बनी हुई है विनिर्माण की वृद्धि: फिक्की सर्वे

नयी दिल्ली, 06 मई (वार्ता) इस साल मार्च में पश्चिम एशिया संकट के बावजूद जनवरी-मार्च तिमाही में देश के विनिर्माण क्षेत्र में आशावाद बढ़ा है और पहले की तुलना में अधिक विनिर्माताओं ने उत्पादन में स्थिरता या वृद्धि की सूचना दी है।
उद्योग मंडल फिक्की ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के लिए जारी हालिया विनिर्माण सर्वेक्षण में यह बात कही है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया गया है कि गत 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 93 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उच्च या समान उत्पादन स्तर की जानकारी दी है। तीसरी तिमाही में यह संख्या 91 प्रतिशत थी। यह आशावाद घरेलू मांग में भी दिखा, जहां 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पिछली तिमाही की तुलना में चौथी तिमाही में अधिक या समान ऑर्डर की उम्मीद जतायी।
यह सर्वेक्षण वाहन एवं वाहनों के कलपुर्जे, पूंजीगत वस्तुओं, रसायन, उर्वरक एवं फार्मास्युटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स, मशीन टूल्स, धातु एवं धातु उत्पाद, तथा वस्त्र, परिधान एवं तकनीकी वस्त्र जैसे उद्योगों के बड़े और मझौले तथा छोटे उद्यमों की विनिर्माण इकाइयों की प्रतिक्रिया पर आधारित हैं, जिनका संयुक्त वार्षिक टर्नओवर आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तरफा कंपनियों के क्षमता उपयोग में हल्की गिरावट आयी है और दूसरी तरफ इनवेंट्री कम हुई है। फिक्की के अनुसार, वर्तमान औसत क्षमता उपयोग लगभग 72 प्रतिशत है, जो पिछले सर्वे की तुलना में थोड़ा कम है। वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति (आयात शुल्क, व्यापार प्रतिबंध और आर्थिक अनिश्चितता) और संचालन संबंधी मुद्दे (श्रम की उपलब्धता, कच्चे माल की कमी, नियामकीय चुनौतियां) इसके मुख्य कारण हैं।
तीसरी तिमाही में लगभग 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उच्च या समान इन्वेंट्री स्तर की सूचना दी थी। यह आंकड़ा चौथी तिमाही में लगभग 86 प्रतिशत रहा।
अगले तीन महीनों में 41 फीसदी उत्तरदाता अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की योजना बना रहे हैं, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 38 फीसदी था।
इस फिक्की का कहना है कि चौथी तिमाही में उत्पादन लागत ऊंची बनी रही। लगभग 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बिक्री के प्रतिशत के रूप में उत्पादन लागत में वृद्धि दर्ज की, जबकि पिछली तिमाही में ऐसा बताने वालों की संख्या 57 प्रतिशत थी। लागत में वृद्धि के मुख्य कारण कच्चे माल की कीमतों का बढ़ना, रुपये में जारी गिरावट, और लॉजिस्टिक्स, बिजली एवं यूटीलिटी लागत में बढ़ोतरी रहे।
सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले लगभग 79 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्हें श्रमिकों की उपलब्धता में कोई समस्या नहीं है जबकि शेष 21 प्रतिशत का मानना है कि उनके क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की कमी है और इस दिशा में सरकार तथा उद्योग दोनों को प्रयास बढ़ाने की आवश्यकता है।
अजीत जितेन्द्र
वार्ता
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