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मई में घर की थाली की लागत पांच-सात प्रतिशत बढ़ी: क्रिसिल

नयी दिल्ली, 03 जून (वार्ता) रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की मासिक 'रोटी चावल रेट' रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मई में, घर पर बनी शाकाहारी और मांसाहारी भोजन की थाली की लागत में पिछले साल इसी माह के मुकाबले क्रमशः पांच प्रतिशत और सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
गुरुवार को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार इसकी मुख्य वजह टमाटर, वनस्पति तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (रसोईं गैस) की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है।
क्रिसिल 'रोटी चावल रेट' के अनुसार मई 2025 की तुलना में इस बार मई में टमाटर की कीमत 57 प्रतिशत बढ़कर 23 रुपये प्रति किलोग्राम की जगह 36 रुपये हो गयी। टमाटर के उत्पादन में 3-4 प्रतिशत की गिरावट के कारण भाव चढ़ गये थे। इसी तरह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े दबावों के कारण वनस्पति तेल और रसोईं गैस के भाव भी पिछले साल के मुकाबले क्रमशः आठ प्रतिशत और सात प्रतिशत बढ़ गये।
क्रिसिल इंटेलीजेंस के निदेशक पूषण शर्मा की राय में इस वर्ष जून से अगस्त तक टमाटर की कीमतें ऊंची रहने के आसार हैं, क्योंकि टमाटर की खेती करने वाले प्रमुख उत्तरी राज्यों में गर्मी टमाटर की रोपायी प्रभावित हुई है और इसका असर आपूर्ति पर पड़ सकता है। आलू की कीमतें भी थोड़ी बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि रबी की कटाई का मौसम खत्म हो रहा है और कोल्ड-स्टोरेज में रखा महंगा स्टॉक बाज़ार में आ रहा है। इस साल रबी उत्पादन में अनुमानित पांच प्रतिशत की गिरावट के कारण आने वाले महीनों में प्याज भी महंगा होने की संभावना है।
क्रिसिल इंटेलीजेंस के अनुसार घरेलू स्तर पर पर्याप्त उपलब्धता के कारण आने वाले महीनों में दालों की कीमतें कम रहने की उम्मीद है। दाल-दलहन विपणन वर्ष जुलाई-जून 2026-27 में दालों का उत्पादन थोड़ा अधिक रहने का अनुमान है। ‘मूल्य समर्थन योजना’ के तहत सरकारी स्टॉक भी बढ़कर लगभग 43 लाख टन हो गया है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है। मोज़ाम्बिक से ‘तूर’ के आयात में कमी से दालों की कीमतों को कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन घरेलू स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति, तूर और उड़द का शुल्क-मुक्त आयात, और बफर स्टॉक की लगातार उपलब्धता से आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
घर की रोजमर्रा की थाली पर क्रिसिल की इस मासिक रिपोर्ट को तैयार करने में देश के सभी हिस्सों में आवश्यक सामग्री की औसत लागत देखी जाती है। लागत बढ़ने पर आम आदमी पर भोजन-पानी के खर्च का बोझ भी बढ़ जाता है।
भारत सरकार के 'घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण' के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में औसत 'मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय' लगभग 4,122 रुपये है, जबकि शहरी इलाकों में यह 6,996 रुपये है। लगभग 4-5 लोगों के औसत परिवार आकार को देखते हुए, एक औसत भारतीय परिवार का खाने- पीने का खर्च हर महीने लगभग 17,000 - 30,000 रुपये बनता है।
मनोहर.श्रवण
वार्ता
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