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ऋषभ साहनी ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल में फिल्म 'इकोज़ ऑफ वैलोर' से किया लोगों को प्रभावित

मुंबई, 04 सितंबर (वार्ता) फिल्म फाइटर में ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण के साथ अपना बॉलीवुड डेब्यू करने वाले अभिनेता ऋषभ साहनी ने अब अपनी दूसरी फिल्म 'इकोज़ ऑफ वैलोर' के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है।
कोलकाता में जन्मीं फिल्मकार इंदिरा धर द्वारा निर्देशित, फिल्म 'इकोज़ ऑफ वैलोर' कान फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने के बाद 82वें वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाई गई।भारतीय सेना के एक सैनिक की माँ, शुक्ला बंदोधाप्याय के जीवन से प्रेरित फिल्म 'इकोज़ ऑफ वैलोर' एक सैन्य परिवार के त्याग, साहस और प्रेम की दिल छू लेने वाली कहानी पेश करती है। इस फिल्म में दमदार कलाकार दिव्या दत्ता और नीरज काबी हैं और ऋषभ साहनी ने इसमें एक खास भूमिका निभाई है, जो एक अभिनेता के रूप में उनकी कला को दर्शाती है।
ऋषभ साहनी ने कहा, "दिव्या जी की सादगी और भावनात्मक गहराई और नीरज सर की गंभीरता और समर्पण फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हैं। ऐसे दमदार कलाकारों के साथ एक ही फ्रेम में होना मेरे लिए गर्व की बात है।"
फिल्म 'इकोज़ ऑफ वैलोर' सबसे पहले मई में कान फिल्म फेस्टिवल में सुर्खियों में आई थी, जहां फिल्ममेकर शेखर कपूर ने इंडिया पवेलियन में इसे लॉन्च किया था। वहाँ इसे मिली अच्छी प्रतिक्रिया ने फिल्म के वेनिस प्रदर्शन का रास्ता तैयार किया, जिससे निर्देशक इंदिरा धर की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय पहचान को और भी मजबूती मिली है। ऋषभ साहनी के लिए यह फिल्म उनके करियर में एक बड़ा पड़ाव है। फाइटर जैसी एक्शन फिल्म से अब वह एक कहानी-आधारित फिल्म की ओर बढ़े हैं, जिसे अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। फिल्म 'इकोज़ ऑफ वैलोर' के साथ उन्होंने यह बता दिया है कि वे ऐसी भूमिकाएँ निभाना चाहते हैं, जो कमर्शियल सफलता के साथ-साथ सार्थक कहानियों को भी आगे बढ़ाएँ।
प्रेम
वार्ता
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हुमा कुरैशी की 'बेबी डू डाई डू' का टीज़र जारी, रहस्यमयी सुपारी किलर की दुनिया की पहली झलक

09 Jun 2026 | 2:09 PM

मुंबई, 09 जून (वार्ता) अभिनेत्री हुमा कुरैशी की आगामी फिल्म बेबी डू डाई डू का बहुप्रतीक्षित टीज़र जारी कर दिया गया है। इसमें दर्शकों को बेबी करमरकर की रहस्यमयी और रोमांचक दुनिया की पहली झलक देखने को मिलती है। फिल्म में बेबी करमरकर को भारत की पहली देसी महिला सुपारी किलर के रूप में प्रस्तुत किया गया है।फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहीं हुमा कुरैशी के साथ सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा, रचित सिंह और मरुधर शेखावत भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।.

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'पुष्पा इम्पॉसिबल' ने पूरे किए चार साल, दर्शकों के प्यार को टीम ने बताया सबसे बड़ी ताकत

09 Jun 2026 | 1:59 PM

मुंबई, 09 जून (वार्ता)सोनी सब के लोकप्रिय पारिवारिक धारावाहिक पुष्पा इम्पॉसिबल ने अपने प्रसारण के चार सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। साहस, आत्मनिर्भरता और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी पर आधारित इस धारावाहिक ने अपनी भावनात्मक कहानी और सशक्त किरदारों के जरिए दर्शकों के बीच विशेष पहचान बनाई है।.

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'नागबंधम' में अब्दाली के किरदार के लिए ऋषभ साहनी ने की गहन रिसर्च

09 Jun 2026 | 12:35 PM

मुंबई, 09 जून (वार्ता) अभिनेता ऋषभ साहनी अपनी आने वाली फिल्म 'नागबंधम' में अपने किरदार 'अब्दाली' को पर्दे पर अधिक प्रभावशाली और वास्तविक बनाने के लिए व्यापक तैयारी कर रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, साहनी ने इस भूमिका के लिए केवल शारीरिक प्रशिक्षण ही नहीं लिया, बल्कि ऐतिहासिक और भाषाई स्तर पर भी गहन अध्ययन किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक वर्ष से अधिक समय तक तलवारबाजी का प्रशिक्षण प्राप्त किया, पश्तो भाषा सीखी और फिल्म के लिए हिंदी तथा तेलुगु दोनों भाषाओं में स्वयं डबिंग भी की है।.

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आमिर खान प्रोडक्शंस की 'बंटवारा 1947' का मोशन पोस्टर रिलीज ,14 अगस्त को रिलीज होगी फिल्म

09 Jun 2026 | 12:30 PM

मुंबई, 09 जून (वार्ता) आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बन रही बहुप्रतीक्षित फिल्म 'बंटवारा 1947' का मोशन पोस्टर रिलीज कर दिया गया है। इस फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे, जबकि इसका निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार राजकुमार संतोषी ने किया है।.

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पार्श्वगायक बनना चाहते थे राज खोसला

09 Jun 2026 | 11:12 AM

मुंबई, 09 जून (वार्ता) हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक राज खोसला ने अपनी फिल्मों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, कभी फिल्म निर्देशक नहीं बल्कि पार्श्वगायक बनने का सपना देखा करते थे।31 मई 1925 को लुधियाना में जन्मे राज खोसला का बचपन से ही संगीत और गायन की ओर विशेष रुझान था। उन्होंने आकाशवाणी में उद्घोषक और पार्श्वगायक के रूप में भी काम किया। महज 19 वर्ष की आयु में पार्श्वगायक बनने की इच्छा लेकर वह मुंबई पहुंचे। मुंबई आने के बाद उन्होंने रंजीत स्टूडियो में स्वर परीक्षण दिया, जिसमें वह सफल भी रहे, लेकिन स्टूडियो के मालिक सरदार चंदूलाल शाह ने उन्हें गायक के रूप में अवसर नहीं दिया। उस समय.

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