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विधायक लालपुरा को चार साल की सज़ा के बाद मान इस्तीफा दें : ब्रह्मपुरा

तरनतारन, 12 सितंबर (वार्ता) शिरोमणि अकाली दल के उपाध्यक्ष और खडूर साहिब के पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को 2013 में एक महिला के साथ अत्याचार के मामले में दोषी करार देते हुए चार साल की सज़ा को "पंजाब की बेटी और न्याय की ऐतिहासिक जीत" बताया।
उल्लेखनीय है कि तरनतारन की एक अदालत ने शुक्रवार को लालपुरा को 2013 के मारपीट और छेड़छाड़ के एक मामले में चार साल जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने घटना के समय विधायक लालपुरा, जो उस समय टैक्सी चालक थे, के साथ-साथ पाँच पुलिसकर्मियों - दविंदर कुमार, सारज सिंह, अश्विनी कुमार, तरसेम सिंह और हरजिंदर सिंह को भी दोषी ठहराया। हालाँकि, गगनदीप सिंह और पुलिसकर्मी नरिंदरजीत सिंह और गुरदीप राज सहित तीन अन्य को न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा गया। पीड़िता के वकील अमित धवन के अनुसार, यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 324 और 354 के साथ-साथ एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया था। कुल 12 लोगों को दोषी ठहराया गया, जिनमें से सात गिरफ्तार हो चुके हैं, एक की मौत हो चुकी है और एक पहले से ही तिहाड़ जेल में बंद है। तीन आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
यहाँ जारी एक बयान में श्री ब्रह्मपुरा ने कहा कि तरनतारन की अदालत का फैसला सिर्फ़ एक अपराधी को सज़ा देने के बारे में नहीं था, बल्कि हरबिंदर कौर के साहस और दृढ़ संकल्प की जीत थी, जिन्होंने 12 साल की लंबी और दर्दनाक कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा, "इस फैसले ने आप के तथाकथित 'स्वच्छ राजनीति' के मुखौटे के पीछे छिपे आपराधिक और गैंगस्टर तत्वों को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।"
फैसले के कानूनी निहितार्थों की ओर इशारा करते हुए, श्री ब्रह्मपुरा ने कहा कि चूँकि लालपुरा को दो साल से ज़्यादा की जेल की सज़ा सुनाई गयी है, इसलिए वह स्वतः ही पंजाब विधानसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य हो जाते हैं। उन्होंने मांग की कि विधानसभा अध्यक्ष 24 घंटे के भीतर लालपुरा की सदस्यता रद्द करने की औपचारिक अधिसूचना जारी करें, अन्यथा यह न्यायपालिका के फैसले का अनादर होगा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा हमला करते हुए श्री ब्रह्मपुरा ने कहा, "यह सज़ा सिर्फ़ लालपुरा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री मान और आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर भी लागू होती है, जो ऐसे आपराधिक तत्वों को संरक्षण देते रहे हैं। एक दोषी को बचाने के लिए अपनी सीमा से बाहर जाने वाले मुख्यमंत्री ने शासन करने का हर नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।"
ठाकुर, उप्रेती
वार्ता
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