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ईरान युद्ध, ताइवान हथियार सौदे और क्यूबा नीति पर सीनेट के निशाने पर आये रुबियो

वाशिंगटन, 03 जून (वार्ता) पश्चिम एशिया में हालिया सैन्य तनाव बढ़ने के बाद पहली बार अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष पेश हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ईरान, ताइवान और क्यूबा से जुड़ी नीतियों पर सीनेटरों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति का बचाव करते हुए दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है और ईरान अब अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के लिए पहले की तुलना में अधिक खुलापन दिखा रहा है।
श्री रुबियो ने कहा कि जिन मुद्दों को पहले बातचीत से बाहर माना जाता था, वे अब चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं, हालांकि किसी अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी कई महीने लग सकते हैं।
सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस वैन होलेन ने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 40 वर्षों से ऐसे अवसर का इंतजार कर रहे थे और अंततः उन्हें ऐसा राष्ट्रपति मिल गया, जो इस दिशा में कदम उठाने को तैयार था। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को ‘पूरी तरह विफल’ बताया।
श्री रुबियो ने कहा कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल भी देता है, तब भी उसे बड़े आर्थिक लाभ स्वतः नहीं मिलेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों में राहत केवल तब संभव होगी जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर और रियायतें देगा। उन्होंने कहा, “ ईरान जितनी अधिक रियायत देगा, उसे उतना अधिक लाभ मिलेगा। उसे कोई अग्रिम बोनस नहीं दिया जाएगा। ”
श्री रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के नये सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई पर्दे के पीछे वार्ताओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि उनके सभी संदेश मध्यस्थों के माध्यम से लिखित रूप में ही पहुंच रहे हैं। सुनवाई के दौरान उनसे कैरेबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल संदिग्ध नौकाओं पर अमेरिकी सैन्य हमलों की वैधता को लेकर भी सवाल पूछे गए। इन अभियानों में सितंबर की शुरुआत से अब तक 200 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने कहा कि सैन्य कार्रवाई के लिए निर्धारित गोपनीय मानकों में किसी जहाज पर मादक पदार्थों की मौजूदगी को हमले का आधार नहीं माना गया है। श्री रुबियो ने जवाब में कहा कि प्रत्येक सैन्य कार्रवाई की कानूनी समीक्षा की जाती है और कई बार आवश्यक मानदंड पूरे न होने पर हमले रद्द भी किये गये हैं।
ताइवान को प्रस्तावित 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने अभी इस सौदे को मंजूरी नहीं दी है, लेकिन इस पर गंभीरता से विचार जारी है। उन्होंने बताया कि दिसंबर में ताइवान को 11 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी जा चुकी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय में देरी का कारण चीन का दबाव नहीं है, हालांकि चीन लगातार ताइवान को हथियारों की आपूर्ति का मुद्दा उठाता रहता है। रुबियो ने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेना है।
चीन और ईरान के सैन्य संबंधों पर उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब भी चीनी मूल के कुछ सैन्य उपकरण हैं, लेकिन ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि इससे युद्धक्षेत्र की स्थिति में कोई निर्णायक बदलाव आया हो। क्यूबा नीति को लेकर भी रुबियो को तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों ने क्यूबा पर बढ़े ट्रंप प्रशासन के दबाव के खिलाफ ‘क्यूबावासियों की हत्या बंद करो’ और ‘क्यूबा को जीने दो’ जैसे नारे लगाये, जिन्हें बाद में सुरक्षा कर्मियों ने बाहर कर दिया।
क्यूबा मूल के परिवार से आने वाले रुबियो ने प्रशासन की नीति का बचाव करते हुए कहा कि क्यूबा में वास्तविक बदलाव तभी संभव है, जब वहां की राजनीतिक व्यवस्था में बुनियादी परिवर्तन हो।
उन्होंने कहा, “ मुझे नहीं लगता कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार संभव है, जब तक नये लोग सत्ता में नहीं आते या नई सोच विकसित नहीं होती।”
हाल के वर्षों में अमेरिका और क्यूबा के अधिकारियों के बीच संपर्क बढ़ने के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाया है। पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के खिलाफ आपराधिक आरोप लगाये जाने के बाद यह अभियान और तेज हो गया है। श्री रुबियो ने कहा कि क्यूबा अपने कुछ अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कारण अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है और ट्रंप प्रशासन इस खतरे का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शादाब.श्रवण
वार्ता
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इजरायल की हरकतों के लिए अमेरिका ज़िम्मेदार : ईरान

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