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अमेरिका की भू-आर्थिक धमकियों के बीच भारत, ईयू एफटीए वार्ता में कार्बन कर, इस्पात बाजार जैसे मुद्दों को सुलझाने का प्रयास तेज

जयंत रॉय चौधरी
नयी दिल्ली, 10 जनवरी (वार्ता) भारत पर शुल्क और ऊंचा करने तथा ग्रीनलैंड अधिग्रहण जैसे अमेरिका की धमकियों के बीच भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने आपस में मुक्त व्यापार समझौते के लिए चल रही बातचीत में कार्बन कर और स्टील बाजार को उदार बनाये जाने जैसे कुछ जैसे मुद्दों पर मतभेद पाटने और समझौते को जल्द से जल्छ अंतिम रूप देने का तेज कर दिया है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ के अपने समकक्ष मारोश शेफचोविच के साथ लंबी और गहन व्यापार वार्ता की। इन चर्चाओं में यूरोप के विवादास्पद कार्बन कर और कृषि सब्सिडी पर भारत की 'आपत्ति' जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल थे।
यहां वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने यूनीवार्ता को बताया, "हमें भी यह समझौता चाहिए और उन्हें भी, क्योंकि दोनों पक्ष मजबूत बाजार की इच्छा रखते हैं, जो शुल्क की धमकियों से सुरक्षित हों। साथ ही, हम दोनों चीन पर बहुत अधिक निर्भर आपूर्ति शृंखलाओं के विकल्पों की ओर भी बढ़ना चाहते हैं।"
भारत और यूरोपीय संघ का प्रयास है कि एफटीए वार्ता गणतंत्र दिवस से पहे सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुंच जाए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा इस वर्ष गणतंत्र दिवास पर सरकार के अतिथि होंगे।
भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) में डब्ल्यूटीओ अध्ययन केंद्र के पूर्व प्रमुख प्रो. बिस्वजीत धर ने कहा, "जहां तक मेरी जानकारी है, हम बहुत करीब हैं-काफी करीब। यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) टैक्स (कार्बन कर) और भारत की श्रम आवाजाही से जुड़ी मांगों पर समझौते के रास्ते निकल रहे हैं।" यूरोपीय संघ ने अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले उद्योगों के उत्पादों पर अपनी सीमा में विशेष कर लगाने का निर्णय किया है। यूरीय संघ के कार्बन उर्त्सजन के लक्ष्यों में 'लीकेज' रोकने के उद्देश्य से लाया गया कार्बर भारत से पहंचने वाले स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट और उर्वरकों जैसे कार्बन-गहन उत्पादों के आयात को वहां मंहगा कर सकता है। यह कर यूरोपीय उत्पादकों द्वारा ईयू के कार्बन उत्सर्जन प्रमाण-पत्र के व्यापार में चुकाए जाने वाले कार्बन मूल्य के अनुसार लगाया गया है।
भारत ने इस कर से प्रभावित होने वाले घरेलू स्टील और अन्य उत्पादकों के लिए, उनके द्वारा अर्जित कार्बन क्रेडिट के बदले राहत की मांग की है। सीबीएएम के कारण इन उत्पादों की कीमतों में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।भारतीय वार्ताकार इसमें पूर्ण छूट की मांग नहीं कर रहे हैं पर भारत व्यापार समझौते के तहत इसमें लचीलापन चाहता है, जिससे भारत के घरेलू कार्बन-उत्सर्जन कम करने के प्रयासों—जैसे क्षेत्र-विशेष शमन उपाय और 2026 से लागू होने वाली प्रस्तावित 'कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम' को मान्यता मिल सके।
उन्होंने कहा, "इस महीने गणतंत्र दिवस समारोह पर जब यूरोपीय संघ के नेता नयी दिल्ली में होंगे, उससे पहले दोनों पक्षों के व्यापार वार्ताकार कुछ ठोस परिणाम दिखाने की उम्मीद कर रहे हैं।"
अमेरिकी शुल्क और रणनीतिगत फैसलों के खतरे के अलावा, अन्य रणनीतिक पहलू भी इन वार्ताओं को नयी दिशा दे रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिजों के संबंध में अपने 'क्रिटिकल रॉ मैटीरियल्स एक्ट' के तहत यूरोपीय संघ ने दुर्लभ खनिजों और अन्य रणनीतिक खनिजों की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को एक प्रमुख संभावित साझेदार के रूप में चिह्नित किया है।
भारत की सरकारी खनन कंपनी 'इंडियन रेयर अर्थ्स' हर वर्ष 1,300 से 1,500 टन नियोडिमियम ऑक्साइड का उत्पादन करती है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइनों और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि ऐसी आपूर्ति शृंखलाओं की 'फ्रेंड-शोरिंग' से भविष्य के व्यवधानों से यूरोपीय संघ को सुरक्षा मिल सकती है।
एक दशक से अधिक समय तक चली इन वार्ताओं में अधिकांश अन्य विवादित बिंदु लगभग सुलझ चुके हैं। इसके तहत भारत को वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टील सहित कई उत्पादों पर शुल्क में रियायतें मिलने की उम्मीद है। चर्चा से जुड़े अधिकारियों ने कहा, यूरोपीय संघ को उच्च श्रेणी की ऑटोमोबाइल, वाइन और "संभवतः कुछ डेयरी उत्पादों" पर कम शुल्क पर बाजार पहुंच मिल सकती है, हालांकि "हमारे डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रावधानों के साथ।"
आधिकारियों के अनुसार वार्ता में मुख्य अड़चन कार्बन कर की बतायी जा रही है। यूरोप की जलवायु महत्वाकांक्षाओं और भारत की व्यापार प्राथमिकताओं के बीच यह कर एफटीए वार्ता में स्पीड ब्रेकर बन गया है।
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2024 में दोनों ओर से 140 अरब अमेरिकी डॉलर का वस्तु व्यापार हुआ था । यूरोपीय संघ के लिए भारत उसका नौवां सबसे बड़ा, लेकिन सबसे तेजी से बढ़ता व्यापारिक साझेदार है।
प्रदीप, मनोहर
वार्ता
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