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हरित ऊर्जा क्षेत्र में 44 लाख पूर्णकालिक रोजगार सृजन की क्षमता: रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 03 जून (वार्ता) देश का 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत निर्धारित उद्देश्य आने वाले समय में 44 लाख से अधिक रोजगार सृजित कर सकते हैं।
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) और नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल इंडिया (एनआरडीसी इंडिया)के एक नये अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। बुधवार को जारी अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि रूफटॉप सोलर सबसे बड़ा रोजगारदाता होगा, जिसकी कुल अनुमानित नयी नौकरियों में लगभग 43 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।
'ड्राइविंग एनर्जी ट्रांजिशन: वर्कफोर्स, स्किल्स, एंड जेंडर इन इंडियाज रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर' नाम से जारी यह रिपोर्ट नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तकनीकी मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। यह वर्ष 2024–25 में सौर, पवन, जैव ऊर्जा और जलविद्युत क्षेत्रों की कंपनियों के बीच किये गये एक प्राथमिक सर्वेक्षण पर आधारित है।
इस अध्ययन ने विभिन्न स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और व्यवसायीकरण वाले चरणों में कर्मचारियों की जरूरत का आकलन करने के लिए नया पूर्णकालिक रोजगार गुणांक तैयार किया है। इसके जरिये उपकरणों के विनिर्माण, परियोजनाओं की स्थापना और संचालन में आने वाले प्रत्यक्ष रोजगार का आकलन किया गया है। भारत अब कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा, कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य समय से पांच साल पहले 2025 में पूरा कर चुका है।
इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर बात करते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा, "एक सफल हरित परिवर्तन के लिए लोगों की भागीदारी एकदम बुनियादी तत्व है। लोगों को इस हरित परिवर्तन के केंद्र में रखने से होने वाले सकारात्मक और अप्रत्यक्ष लाभ इसमें शामिल होते हैं। भारत ने यह दिखा दिया है कि हमारा आर्थिक विकास और पर्यावरण को एक साथ लेकर चलना संभव है। पिछले साल, हमने लगभग 51 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा क्षमता हासिल की है, और उम्मीद है कि यह रफ्तार आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी, इसका और अधिक विस्तार होगा।"
सीईईडब्ल्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा, "भारत का ऊर्जा परिवर्तन कार्यबल का परिवर्तन भी होना चाहिये। यह अवसर रोजगार सृजन, कौशल निर्माण, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ इसके लाभ परिवारों, किसानों, श्रमिकों और उद्यमियों तक भी पहुंचें।"
उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर स्वच्छ बिजली उत्पादित करते हैं और साथ ही बड़ी परियोजनाओं की तुलना में प्रति मेगावाट क्षमता पर अधिक रोजगार भी देते हैं। देश की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षा को एक टिकाऊ रोजगार इंजन में बदलने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कौशल विकास, कर्मचारियों के पारदर्शी आंकड़े और समावेशी भागीदारी में अपना निवेश जारी रखना चाहिये।"
सीईईडब्ल्यू-एनआरडीसी के अध्ययन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2025-26 के बीच स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में जुड़े 6.5 लाख कर्मचारियों का सबसे बड़ा हिस्सा रूफटॉप सोलर में काम कर रहा है, जो कर्मचारियों की कुल वृद्धि का 62 प्रतिशत था। इसके बाद पीएम-कुसुम की हिस्सेदारी 16.3 प्रतिशत, जैव ऊर्जा की 12.6 प्रतिशत और जमीन पर लगी सौर परियोजनाओं की छह प्रतिशत रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूफटॉप सोलर इसलिए अधिक रोजगार सृजित करता है, क्योंकि यह बड़े सौर या पवन ऊर्जा परियोजनाओं की तरह किसी एक जगह पर नहीं, बल्कि हर एक घर, दुकान और इमारत पर अलग-अलग लगता है। इसका अर्थ है कि ग्राहकों तक पहुंचने, जगह की जांच, डिजाइनिंग, स्थापना, ग्रिड से जोड़ने और रखरखाव जैसे कार्यों के लिए ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत होती है।
एनआरडीसी इंडिया की स्थानीय निदेशक दीपा सिंह बगई ने कहा, "देश की आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों के लिए स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े रोजगार बहुत जरूरी हैं। यह अध्ययन दिखाता है कि विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा, विशेष रूप से रूफटॉप सोलर, शहरों, छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित कर सकती है। लेकिन इसके लिए सुविचारित योजना, कर्मचारियों के संख्या की विश्वसनीय रिपोर्टिंग और मजबूत औद्योगिक प्रशिक्षण देने के लिए साझेदारियों की जरूरत होगी, ताकि कार्यबल देश के एनर्जी ट्रांजिशन के अगले चरण के लिए पूरी तरह से तैयार रहे।"
इस अध्ययन से पता चलता है कि सौर और पवन ऊर्जा को स्थापित करने और उपकरण निर्माण क्षेत्रों के कुल कार्यबल में महिलाओं का हिस्सा सिर्फ 11 प्रतिशत है। रूफटॉप सोलर में महिलाओं की सर्वाधिक 15 प्रतिशत भागीदारी है। इसके बाद सोलर मॉड्यूल निर्माण में 13 प्रतिशत, फ्लोटिंग सोलर में 12 प्रतिशत और जमीन पर लगने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स में 11 प्रतिशत है। अध्ययन के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा कार्यबल में शामिल 61 प्रतिशत महिलाएं गैर-तकनीकी भूमिकाओं में काम करती हैं।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और संबंधित संस्थानों को सब्सिडी वितरण, निविदाओं और नियामक ढांचे जैसी मौजूदा प्रक्रियाओं के जरिये कार्यबल की अनिवार्य रिपोर्टिंग को संस्थागत रूप देना चाहिये। इसके साथ, स्वच्छ ऊर्जा कंपनियों से लैंगिक समावेश और करियर को उन्नत बनाने वाले कार्यक्रम में निवेश करने की अपील करनी चाहिये।
अजीत जितेन्द्र
वार्ता
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