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विश्व साइकिल दिवस: साइकिल को टिकाऊ परिवहन योजना के साथ मजबूती से जोड़ने का शानदार उदाहरण है ताइवान

ताइपे, 03 जून (वार्ता) कारों, उड़ानों और स्मार्टफोन के इस दौर में साइकिल को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन अब इसे टिकाऊ एवं पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के रूप में फिर से केंद्र में लाया जा रहा है तथा साइकिल चलाने के इस बड़े बदलाव का सबसे बेहतरीन उदाहरण ताइवान में देखने को मिलता है, जहां यह केवल सेहत बनाने या मनोरंजन का जरिया न रहकर राष्ट्रीय पर्यावरण नीति और पर्यटन रणनीति का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है।
दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी 'जायंट बाइसिकल्स' का गढ़ होने के नाते, ताइवान ने साइकिलिंग का एक बेहद शानदार और विशाल बुनियादी ढांचा तैयार किया है। इस नेटवर्क में साइकिलों के लिए विशेष रूप से बनाए गए अलग हाईवे, साइकिलों को साझा करने की शानदार व्यवस्था और साइकिल चालकों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार की गई आधुनिक शहरी योजनाएं शामिल हैं।
ताइवान की इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ 'ताइवान साइकिलिंग रूट नंबर 1' है। यह 960.8 किलोमीटर लंबा एक ऐसा अनूठा साइकिलिंग ट्रैक है जो पूरे द्वीप का चक्कर लगाता है और वहां के 16 प्रमुख शहरों व जिलों से होकर गुजरता है। यह खूबसूरत ट्रैक समंदर के तटीय राजमार्गों, शांत ग्रामीण इलाकों और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है, जिसकी पूरी यात्रा को साइकिल सवार आमतौर पर 9 से 15 दिनों में रोमांच के साथ पूरा करते हैं।
विशेष रूप से पर्यटन के लिए विकसित किए गए यहाँ के साइकिल मार्गों को आज वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिल चुकी है। अपनी बेहद खूबसूरत 30 किलोमीटर लंबी बाइक-लेन के साथ 'सन मून लेक' को आज दुनिया के सबसे सुंदर साइकिलिंग स्थलों में से एक माना जाता है। वहीं देश की राजधानी ताइपे में, 100 किलोमीटर से भी अधिक लंबे नदी के किनारे बने साइकिल ट्रैक को वहां के मेट्रो सिस्टम से बेहद आसान तरीके से जोड़ा गया है।
ताइवान के पूर्वी तट पर हुआलीन और ताइतुंग शहरों के बीच, साइकिल सवार गगनचुंबी पहाड़ियों, लहलहाते धान के खेतों और स्थानीय आदिवासी बस्तियों के बीच से गुजरने वाली शांत सड़कों पर साइकिल चलाने का आनंद लेते हैं। वहीं दूसरी ओर, पेशेवर एथलीटों के लिए यहाँ 'ताइवान केओएम चैलेंज' नाम की एक बेहद कठिन प्रतियोगिता आयोजित होती है, जिसमें खिलाड़ियों को समुद्र तल से शुरू करके 3,000 मीटर से भी अधिक ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर चढ़ाई करनी होती है।
इस पूरे बुनियादी ढांचे के विकास के पीछे ताइवान का एक बड़ा पर्यावरणीय दृष्टिकोण छिपा है, जिसके तहत साइकिलिंग को देश के शून्य कार्बन उत्सर्जन (नेट जीरो) लक्ष्यों और टिकाऊ परिवहन योजना के साथ मजबूती से जोड़ दिया गया है।
आज जब दुनिया भर के तमाम बड़े शहर सामूहिक साइकिल राइड्स और विशेष जागरूकता अभियानों के जरिए विश्व साइकिल दिवस को मना रहे हैं, तो ताइवान के इस कामयाब मॉडल को एक बेहतरीन मिसाल के तौर पर पेश किया जा रहा है। यह मॉडल दुनिया को दिखाता है कि जब साइकिलिंग को केवल एक वैकल्पिक शौक नहीं, बल्कि देश के जरूरी बुनियादी ढांचे का हिस्सा माना जाए, तो पर्यावरण को कितना बड़ा फायदा हो सकता है।
महंगे उपकरणों के इस युग में बेहद कम कीमत में आने वाली, प्रदूषण मुक्त और बिना किसी महंगे ईंधन के चलने वाली यह साइकिल मानव इतिहास के सबसे कुशल परिवहन साधन रही है। इसके बावजूद, बीते कई दशकों से इसे मुख्य परिवहन नीतियों का हिस्सा बनाने के बजाय हमेशा एक दूसरे दर्जे का सफर मानकर हाशिए पर रखा गया।
हर साल तीन जून को मनाए जाने वाले 'विश्व साइकिल दिवस' की इस वर्ष की मुख्य थीम 'एक हरित भविष्य के लिए साइकिलिंग' रखी गई है। यह थीम परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने की भारी जरूरत को रेखांकित करती है, जो दुनिया भर में उत्सर्जित होने वाले कुल कार्बन का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का साफ कहना है कि साइकिल की तरफ लौटना अतीत की यादों में खोना नहीं है, बल्कि यह हमारे सुरक्षित भविष्य का एक बेहद व्यावहारिक समाधान है।
आंकड़ों के मुताबिक, आज दुनिया भर में करीब एक अरब से अधिक साइकिलें उपयोग में हैं, जो सड़कों पर दौड़ने वाली कारों की संख्या से लगभग दोगुनी हैं। नीदरलैंड और डेनमार्क जैसे यूरोपीय देशों में आज भी रोजमर्रा के 25 प्रतिशत से अधिक सफर साइकिल के जरिए ही तय किए जाते हैं, जबकि बोगोटा और नैरोबी जैसे बड़े वैश्विक शहरों ने भारी ट्रैफिक जाम से निपटने और आम जनता के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अपने यहाँ साइकिल ट्रैक का तेजी से विस्तार किया है।
चिकित्सा और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लगातार साइकिल चलाने के चमत्कारी फायदों को सामने रख रहे हैं। रोज़ाना साइकिल चलाने से दिल की सेहत दुरुस्त रहती है, मानसिक तनाव कम होता है और मोटापे व डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा काफी घट जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने व्यायाम न करने की आदत को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चिंताओं में से एक माना है, और इस जानलेवा सुस्ती से बचने के लिए साइकिल चलाना आज भी दुनिया का सबसे आसान और सुलभ उपाय है।
भारत अशोक
वार्ता
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