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श्री शर्मा ने स्कंदपुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र तथा दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। भारत की संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। यहां पृथ्वी को माता, नदियों को देवी और वृक्षों को देवतुल्य मानने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि पीपल, अशोक, आम, बिल्व जैसे वृक्ष और हरियाली तीज, बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि जैसे पर्व प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति हमारी आस्था और संवेदनशीलता के प्रतीक हैं। श्री शर्मा ने कहा कि समाज में…

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टेक्स्ट
यूआरएल स्लग:
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स्रोत:
UNI Varta
कैटेगरी
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प्रकाशित तिथि
01/08/26 16:58
पिछला अपडेट
01/08/26 16:58
स्थान
India